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पहले श्रमदान से रास्ता बनाया, फिर गर्भवती को ले गए

Tue, 04 Sep 2018 11:30 PM IST
Updated Tue, 04 Sep 2018 11:30 PM IST
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पहले श्रमदान से रास्ता बनाया, फिर गर्भवती को ले गए
पिथौरागढ़/नाचनी। असुविधाओं की मार से उच्च हिमालयी क्षेत्र के नामिक गांव में गर्भवती महिला और उसके पेट में पल रहे बच्चे की जान पर बन आई। मौसम खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर नामिक नहीं पहुंच पाया। नामिक गांव के 124 परिवारों के लोगों ने बरसात के कारण क्षतिग्रस्त मार्ग को श्रमदान से पैदल चलने लायक बनाया। आठ किमी डोली में ढोने के बाद 27 किमी दूर शामा तक निजी वाहन से लाए, जहां महिला का प्रसव कराया गया।
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नामिक की दुर्गा देवी पत्नी दरपान राम को सोमवार सुबह से प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव में स्वास्थ्य सुविधा न होने और रास्ता क्षतिग्रस्त होने के कारण दुर्गा देवी को बागेश्वर अस्पताल पहुंचाने की समस्या खड़ी हो गई। ग्राम प्रधान तुलसी जेम्याल ने हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग से संपर्क किया। प्रशासन ने हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने की अनुमति दे दी, लेकिन धारचूला और ऊपरी इलाकों के कारण हेलीकॉप्टर धारचूला से उड़ान नहीं भर पाया। इस कारण सोमवार को गांव के लोग दुर्गा देवी को अस्पताल नहीं ला पाए।
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मंगलवार को गांव के सभी परिवारों के लोगों ने मिलकर नामिक से गोगिना (बागेश्वर) को जाने वाले क्षतिग्रस्त रास्ते की मरम्मत की। रास्ता कई स्थानों पर ध्वस्त था। मंगलवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे गांव के लोग दुर्गा देवी को डोली से गोगिना लेकर आए। गोगिना से निजी वाहन से लोगों ने शामा पहुंचाया। शामा के अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में कपकोट अस्पताल से आए डॉक्टर ने दुर्गा देवी का परीक्षण किया। इसके बाद शाम पांच बजे दुर्गा देवी ने शामा अस्पताल में स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं।
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एएनएम सेंटर को छह साल से संचालन का इंतजार
नामिक में स्वास्थ्य सेवा न होने से लोगों में रोष है। ग्राम प्रधान तुलसी जेम्याल ने कहा कि नामिक में वर्ष 2012 में एएनएम सेंटर का उद्घाटन किया, लेकिन एएनएम की तैनाती नहीं की गई। सेंटर उद्घाटन के बाद से संचालित नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि गांव में आशा कार्यकर्ता तैनात है, लेकिन वह गांव में नहीं रहती। स्वास्थ्य सुविधा न होने के कारण हाल में एक नवजात की मौत हो गई थी। यह मामला गांव के लोग विभागीय अधिकारियों के सामने भी उठा चुके हैं।
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