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26 सौ करोड़ से लहलहाएंगे बंजर खेत

Wed, 24 Jan 2018 10:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Wed, 24 Jan 2018 10:39 PM IST
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26 billion rubble farmland
पिथौरागढ़ में सहकारी समितियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद प्रतिनिधि - फोटो : अमर उजाला

राज्य समेकित विकास परियोजना के तहत 26 सौ करोड़ रुपये लागत वाली महत्वाकांक्षी और अभिनव योजना कारगर रही तो उत्तराखंड के बंजर खेत हरा सोना उगलेंगे। सहकारिता विभाग भूमि मालिकों से अनुबंध के आधार पर भूमि किराए पर लेकर सामूहिक खेती कराएगा। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए बतौर पायलट प्रोजेक्ट उत्तराखंड का चयन किया है। उत्तराखंड में योजना की सफलता के बाद अन्य राज्यों में भी इस मॉडल को लागू किया जाएगा।

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पिछले दिनों नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र सरकार ने देश भर से उत्तराखंड का चयन किया है। इस परियोजना के तहत विभाग भूमि मालिकों से अनुबंध करेगा। इसके बाद सहकारी समितियां बंजर भूमि पर विभिन्न उपजों की खेती करेंगी। विभाग भूमि मालिकों को खेती का तय लाभांश देगा। इस परियोजना से राज्य की 759 समितियों को जोड़ा जाएगा। इस परियोजना में चयन के बाद सीनर्जी संस्था को डीपीआर बनाने का काम दिया गया है।
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उम्मीद है कि योजना के अमलीजामा पहनने के बाद बंजर पड़े खेतों में हरियाली होगी। इससे कृषि पैदावार तो बढ़ेगी ही, किसानों और भूमि मालिकों की माली हालत भी सुधरेगी। साथ ही राज्य के पर्वतीय अंचलों से पलायन की दर में कमी आएगी और रोजगार के साधन विकसित होंगे। इसके इतर देखा जाए तो अब तक राज्य की सहकारी समितियों की भूमिका महज खाद, बीज और लोन बांटने तक ही सीमित है, लेकिन अब परियोजना शुरू होने के बाद समितियों की क्रियाशीलता बढ़ेेगी। इससे राज्य में सहकारिता को और मजबूती मिलेगी।
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भविष्य में संचालित होंगी कई कल्याणकारी योजनाएं
शुरुआती चरण में बंजर पड़ी भूमि पर खेती के बाद कई कल्याणकारी सहकारी योजनाएं संचालित करने का लक्ष्य भी रखा गया है। परियोजना के राज्य समन्वयक आनंद शुक्ल ने बताया कि सहकारी समितियों के माध्यम से बंजर या अनुपयोगी भूमि पर पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, डिपार्टमेंटल स्टोर, सहकारी स्कूल, अस्पताल के साथ ही आवासीय योजनाएं भी तैयार होंगी। स्थानीय समुदाय को इन योजनाओं का लाभ मिलेगा।

समितियों को योजना की बुनियादी जानकारी दी
परियोजना में चयन के बाद जिले में योजनाएं तैयार करने की कवायद भी शुरू हो गई है। जिले की 112 समितियां योजना के दायरे में हैं। बुधवार को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के क्षेत्रीय निदेशक राकेश दुआ ने विकास भवन सभागार में समितियों को योजना की बुनियादी जानकारी और प्रशिक्षण दिया। सहकारिता अधिकारियों ने समितियों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। इस दौरान जिला सहायक निबंधक केएस रौंकली, अपर जिला सहकारी अधिकारी केएस लडवाल, जिला सहकारी बैंक उप महाप्रबंधक एमएस भंडारी, सीएस पांगती, पीएस खोलिया, बिजेंद्र लुंठी, कविता पांडेय आदि थे।


इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए देश भर से बतौर पायलट प्रोजेक्ट उत्तराखंड का चयन हुआ है। अब उत्तराखंड पूरे देश में सहकारी खेती का नया मॉडल विकसित करने जा रहा है। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ ही किसानों की माली हालत सुधरेगी। साथ ही पलायन और बेरोजगारी पर भी कुछ हद तक अंकुश लगेगा। यहां योजना की सफलता के बाद इस मॉडल को दूसरे राज्यों में भी लागू कराया जाएगा। -राकेश दुआ, क्षेत्रीय निदेशक, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम

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