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जनजातियों की काष्ठकला और हस्तशिल्प को मिलेगा प्रोत्साहन
Updated Fri, 21 Jul 2017 11:07 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। उत्तराखंड जनजाति कल्याण निदेशालय में निदेशक बीआर टम्टा ने कहा कि जनजातियों की काष्ठकला, हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे। उत्पादित सामग्री की बड़े शहरों में प्रदर्शनी लगाई जाएगी और सरकार इन उत्पादों को बेचने का प्रयास करेगी। इससे जनजातियों का आर्थिक स्तर ऊंचा उठाने में मदद मिलेगी।
टम्टा ने यहां रं कल्याण संस्था के पदाधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि सरकार हस्तशिल्प और काष्ठकला के माध्यम से रोजगार बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहती है। जनजातियों में हस्तशिल्प का बड़ा हुनर है। वह ऊन से कालीन, दन, कंबल आदि तैयार करते हैं। इसके अलावा लकड़ी के बर्तन बनाने की महारत भी जनजातियों में है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह के शिल्प को बाजार उपलब्ध हो जाए तो आजीविका के नए स्रोत विकसित हो जाएंगे और लोगों का इस शिल्प के साथ जुड़ाव बढ़ जाएगा।
उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी, चमोली, ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़ में जनजातियों के शिल्प को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने वाली समस्या का अब सरकार समाधान निकालने जा रही है। बाद में उन्होंने छारछुम, गोठी, बलुवाकोट और जौलजीबी में संचालित हो रहे जनजाति विद्यालयों का निरीक्षण किया। इन विद्यालयों की जरूरतों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपने का ऐलान किया।
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बैठक में रं कल्याण संस्था के संरक्षक अशोक नबियाल, देवकृष्ण फकलियाल, राम सिंह ह्यांकी, भीमराज नबियाल, लाल सिंह खंपा, राजेश कुटियाल, नृप सिंह गर्ब्याल, कैलाश रावत, ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर आदि थे।
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टम्टा ने यहां रं कल्याण संस्था के पदाधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि सरकार हस्तशिल्प और काष्ठकला के माध्यम से रोजगार बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहती है। जनजातियों में हस्तशिल्प का बड़ा हुनर है। वह ऊन से कालीन, दन, कंबल आदि तैयार करते हैं। इसके अलावा लकड़ी के बर्तन बनाने की महारत भी जनजातियों में है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह के शिल्प को बाजार उपलब्ध हो जाए तो आजीविका के नए स्रोत विकसित हो जाएंगे और लोगों का इस शिल्प के साथ जुड़ाव बढ़ जाएगा।
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उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी, चमोली, ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़ में जनजातियों के शिल्प को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने वाली समस्या का अब सरकार समाधान निकालने जा रही है। बाद में उन्होंने छारछुम, गोठी, बलुवाकोट और जौलजीबी में संचालित हो रहे जनजाति विद्यालयों का निरीक्षण किया। इन विद्यालयों की जरूरतों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपने का ऐलान किया।
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बैठक में रं कल्याण संस्था के संरक्षक अशोक नबियाल, देवकृष्ण फकलियाल, राम सिंह ह्यांकी, भीमराज नबियाल, लाल सिंह खंपा, राजेश कुटियाल, नृप सिंह गर्ब्याल, कैलाश रावत, ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर आदि थे।