{"_id":"5bbce9eb867a55282870e0a1","slug":"201539107307-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्वीतड़ वालों ने देखी ‘अपनी धुन में कबूतरी’ फिल्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्वीतड़ वालों ने देखी ‘अपनी धुन में कबूतरी’ फिल्म
Updated Tue, 09 Oct 2018 11:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। प्रोफेसर उमा भट्ट की लोक गायिका स्वर्गीय कबूतरी देवी के जीवन और गायकी पर बनाई गई डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘अपनी धुन में कबूतरी’ का प्रदर्शन कबूतरी के गांव क्वीतड़ में किया गया। काफी संख्या में गांव के लोग फिल्म देखने आए।
डाक्यूमेंट्री फिल्म की निर्माता उमा भट्ट एवं इतिहासकार पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक ने कबूतरी देवी के जीवन संघर्ष और गायकी पर प्रकाश डाला। कहा कि कबूतरी जैसी गायिका का फिर उत्तराखंड की धरती पर पैदा होना कठिन है। प्रोफेसर भट्ट ने बताया कि फिल्म का निर्माण वर्ष 2014 में पूरा हुआ था। इसकी अधिकतर शूटिंग सेरी कुम्डार और क्वीतड़ गांव में हुई है। फिल्म संजय भट्ट के निर्देशन में बनी है।
फिल्म में कैमरामैन के रूप में प्रसिद्ध फोटोग्राफर अपल सिंह ने काम किया है। अपल बीबीसी जैसे प्रसिद्ध संस्थानों के लिए काम कर चुके हैं। कबूतरी देवी की बेटी हेमंती ने प्रोफेसर भट्ट के प्रयास की सराहना की। इस दौरान क्वीतड़ के प्रधान श्याम सुंदर सिंह सौन समेत कई लोग मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
डाक्यूमेंट्री फिल्म की निर्माता उमा भट्ट एवं इतिहासकार पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक ने कबूतरी देवी के जीवन संघर्ष और गायकी पर प्रकाश डाला। कहा कि कबूतरी जैसी गायिका का फिर उत्तराखंड की धरती पर पैदा होना कठिन है। प्रोफेसर भट्ट ने बताया कि फिल्म का निर्माण वर्ष 2014 में पूरा हुआ था। इसकी अधिकतर शूटिंग सेरी कुम्डार और क्वीतड़ गांव में हुई है। फिल्म संजय भट्ट के निर्देशन में बनी है।
विज्ञापन
फिल्म में कैमरामैन के रूप में प्रसिद्ध फोटोग्राफर अपल सिंह ने काम किया है। अपल बीबीसी जैसे प्रसिद्ध संस्थानों के लिए काम कर चुके हैं। कबूतरी देवी की बेटी हेमंती ने प्रोफेसर भट्ट के प्रयास की सराहना की। इस दौरान क्वीतड़ के प्रधान श्याम सुंदर सिंह सौन समेत कई लोग मौजूद थे।
विज्ञापन