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पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रीय पार्टियों से टिकट मांगा
Updated Sun, 27 May 2018 11:17 PM IST
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पिथौरागढ़। पूर्व सैनिकों ने निकाय चुनाव लड़ने का मन बनाया है। इसके लिए पूर्व सैनिक जन कल्याण समिति ने राष्ट्रीय पार्टियों से टिकट मांगा है। संगठन से राष्ट्रीय पार्टियों से टिकट न मिलने पर निर्दल चुनाव लड़ने का एलान भी किया है। इस फैसले के साथ ही संगठन ने चुनाव की तैयारियों के लिए पूर्व सैनिकों को लामबंद करना भी शुरू कर दिया है।
पिथौरागढ़ जिले में पूर्व सैनिकों की संख्या 35 हजार से अधिक है। नगर पालिका क्षेत्र में ही पूर्व सैनिक और आश्रितों की संख्या लगभग 10 हजार है। जनबल और नेतृत्व के गुण के चलते पूर्व सैनिक निकाय चुनाव में अपना प्रतिनिधित्व चाहते हैं। इस बीच पूर्व सैनिक जन कल्याण समिति ने निकाय चुनाव लड़ने का मन बनाया है। संगठन ने राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस से पूर्व सैनिक के लिए टिकट मांगा है।
सोशल मीडिया के जरिये भी इन पार्टियों से टिकट देने की अपील की है। संगठन के अध्यक्ष डीएस वल्दिया का कहना है कि राष्ट्रीय पार्टियों को चुनाव के वक्त ही पूर्व सैनिक याद आते हैैं। पर्याप्त जनबल होने के बाद भी पूर्व सैनिकों की चुनाव में भूमिका महज वोट बैंक तक ही सीमित है। ऐसे में पूर्व सैनिक अपना प्रतिनिधित्व चाहते हैं।
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पूर्व सैनिक और व्यापार संघ अध्यक्ष शमशेर महर का कहना है कि सैनिकों में स्वाभाविक तौर पर नेतृत्व के गुण होते हैं। ऐसे में पूर्व सैनिकों को चुनाव में उतरकर अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने एलान किया कि राष्ट्रीय पार्टियों से टिकट न मिला तो निर्दल चुनाव लड़ा जाएगा। इसके लिए संगठन ने पूर्व सैनिकों के बीच लामबंदी भी शुरू कर दी है।
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पिथौरागढ़ जिले में पूर्व सैनिकों की संख्या 35 हजार से अधिक है। नगर पालिका क्षेत्र में ही पूर्व सैनिक और आश्रितों की संख्या लगभग 10 हजार है। जनबल और नेतृत्व के गुण के चलते पूर्व सैनिक निकाय चुनाव में अपना प्रतिनिधित्व चाहते हैं। इस बीच पूर्व सैनिक जन कल्याण समिति ने निकाय चुनाव लड़ने का मन बनाया है। संगठन ने राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस से पूर्व सैनिक के लिए टिकट मांगा है।
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सोशल मीडिया के जरिये भी इन पार्टियों से टिकट देने की अपील की है। संगठन के अध्यक्ष डीएस वल्दिया का कहना है कि राष्ट्रीय पार्टियों को चुनाव के वक्त ही पूर्व सैनिक याद आते हैैं। पर्याप्त जनबल होने के बाद भी पूर्व सैनिकों की चुनाव में भूमिका महज वोट बैंक तक ही सीमित है। ऐसे में पूर्व सैनिक अपना प्रतिनिधित्व चाहते हैं।
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पूर्व सैनिक और व्यापार संघ अध्यक्ष शमशेर महर का कहना है कि सैनिकों में स्वाभाविक तौर पर नेतृत्व के गुण होते हैं। ऐसे में पूर्व सैनिकों को चुनाव में उतरकर अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने एलान किया कि राष्ट्रीय पार्टियों से टिकट न मिला तो निर्दल चुनाव लड़ा जाएगा। इसके लिए संगठन ने पूर्व सैनिकों के बीच लामबंदी भी शुरू कर दी है।