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20 साल से अटका पुल का प्रस्ताव
ब्यूराे/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Mon, 21 Mar 2016 10:50 PM IST
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20 साल से अटका पुल का प्रस्ताव
- फोटो : अमर उजाला
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भारत से नेपाल को जाने के लिए झूलाघाट में महाकाली पर प्रस्तावित मोटर पुल के निर्माण का प्रस्ताव 1996 से अटका है। भारत और नेपाल के अधिकारी हमेशा होने वाली संयुक्त मीटिंग में इस पुल के निर्माण पर चर्चा तो करते हैं, लेकिन पुल निर्माण की कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाया जाता। यदि पुल बन जाता तो पिथौरागढ़ जिले के लोगों को सीधे काठमांडू पहुंचने में आसानी होती। झूलाघाट से काठमांडू की दूरी 1000 किलोमीटर है और नेपाल के जुलाघाट से काठमांडू तक पक्की सड़क का निर्माण दो वर्ष पूर्व हो गया था।
बताया गया कि 1996 में झूलाघाट में महाकाली पर 90 मीटर लंबे मोटर पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया। तब इसकी लागत 4.12 करोड़ रुपये आंकी गई थी। अब हालांकि यह राशि दोगुना से अधिक हो जाएगी। पुल निर्माण की संभावना का पता लगाने के लिए पिछले दिनों नेपाल में भारत के राजदूत रंजीत रे ने सीमा क्षेत्र का दौरा भी किया था। उन्होंने कहा था कि पुल का निर्माण जल्दी शुरू हो जाएगा। पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए पुल को जरूरी बताया गया था, लेकिन अब तक पुल निर्माण के लिए किसी भी स्तर पर प्रयास नहीं हुआ है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि नेपाल सरकार मोटर पुल के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं दे रही है, जबकि नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार इस काम में रुचि नहीं ले रही है। इस समय दोनों देशों के बीच आवागमन के लिए झूलापुल है।
पुल निर्माण के लिए प्रयास जारी
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन चंद्र जोशी का कहना है कि पुल का सर्वे बदलना पड़ सकता है। 1996 में जब पुल का प्रस्ताव तैयार हुआ तब नेपाल में सड़क नहीं बनी थी। उन्होंने बताया कि लोनिवि के मुख्य अभियंता पुल निर्माण की अड़चन दूर करने के लिए दिल्ली गए हैं। संभव है जल्दी फैसला हो जाएगा।
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कहीं पंचेश्वर बांध की बाधा तो नहीं
लोगों का कहना है कि महाकाली में पंचेश्वर बांध प्रस्तावित है। बांध के डूब क्षेत्र में झूलाघाट भी आ रहा है। हो सकता है कि पंचेश्वर बांध के कारण ही पुल के निर्माण में दोनों देशों के लोग रुचि नहीं दिखा रहे हों। लोगों का कहना है कि सरकार को यह असमंजस दूर करना चाहिए।
अब काम धरातल में दिखना चाहिए
बैतड़ी वाणिज्य संघ के अध्यक्ष नर बहादुर चंद का कहना है कि पुल के लिए दोनों देशों की सरकारें सिर्फ प्रस्ताव तो तैयार करती हैं, लेकिन काम कभी नहीं होता। अब पुल निर्माण का काम धरातल में दिखना चाहिए। इसका फायदा दोनों देशों के लोगों को जरूर मिलेगा।
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बताया गया कि 1996 में झूलाघाट में महाकाली पर 90 मीटर लंबे मोटर पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया। तब इसकी लागत 4.12 करोड़ रुपये आंकी गई थी। अब हालांकि यह राशि दोगुना से अधिक हो जाएगी। पुल निर्माण की संभावना का पता लगाने के लिए पिछले दिनों नेपाल में भारत के राजदूत रंजीत रे ने सीमा क्षेत्र का दौरा भी किया था। उन्होंने कहा था कि पुल का निर्माण जल्दी शुरू हो जाएगा। पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए पुल को जरूरी बताया गया था, लेकिन अब तक पुल निर्माण के लिए किसी भी स्तर पर प्रयास नहीं हुआ है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि नेपाल सरकार मोटर पुल के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं दे रही है, जबकि नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार इस काम में रुचि नहीं ले रही है। इस समय दोनों देशों के बीच आवागमन के लिए झूलापुल है।
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पुल निर्माण के लिए प्रयास जारी
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन चंद्र जोशी का कहना है कि पुल का सर्वे बदलना पड़ सकता है। 1996 में जब पुल का प्रस्ताव तैयार हुआ तब नेपाल में सड़क नहीं बनी थी। उन्होंने बताया कि लोनिवि के मुख्य अभियंता पुल निर्माण की अड़चन दूर करने के लिए दिल्ली गए हैं। संभव है जल्दी फैसला हो जाएगा।
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कहीं पंचेश्वर बांध की बाधा तो नहीं
लोगों का कहना है कि महाकाली में पंचेश्वर बांध प्रस्तावित है। बांध के डूब क्षेत्र में झूलाघाट भी आ रहा है। हो सकता है कि पंचेश्वर बांध के कारण ही पुल के निर्माण में दोनों देशों के लोग रुचि नहीं दिखा रहे हों। लोगों का कहना है कि सरकार को यह असमंजस दूर करना चाहिए।
अब काम धरातल में दिखना चाहिए
बैतड़ी वाणिज्य संघ के अध्यक्ष नर बहादुर चंद का कहना है कि पुल के लिए दोनों देशों की सरकारें सिर्फ प्रस्ताव तो तैयार करती हैं, लेकिन काम कभी नहीं होता। अब पुल निर्माण का काम धरातल में दिखना चाहिए। इसका फायदा दोनों देशों के लोगों को जरूर मिलेगा।