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Pithoragarh News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा
Thu, 20 Jul 2023 10:58 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 20 Jul 2023 10:58 PM IST
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पिथौरागढ़। विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) शंकर राज की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल के कठोर कारावास और 80 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामले के अनुसार गंगोलीहाट का टिम्टा निवासी सुमितानंद मार्च 2019 में एक नाबालिग को अपने साथ हरिद्वार, अमृतसर और दिल्ली ले गया। इस दौरान होटल में ठहरकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इस मामले में पीड़िता के परिजनों की ओर से गंगोलीहाट थाने में सुमितानंद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। यह मामला विशेष सत्र न्यायालय में चला। मामले में पीड़िता और उसके माता-पिता सहित कुल आठ गवाह परीक्षित कराए गए।
विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोष सिद्ध करते हुए बृहस्पतिवार को सजा सुनाई। आईपीसी की धारा 363 के तहत सुमितानंद को सात साल के कठोर कारावास और 10 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। धारा 366 के लिए 10 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड नहीं देने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
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इसके अलावा धारा 376 (2)(झ)(3) के अपराध के लिए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड नहीं देने पर पांच वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। न्यायाधीश ने कहा कि यदि अभियुक्त जुर्माना की धनराशि जमा करता है तो उसमें से 60 हजार रुपये पीड़िता को बतौर प्रतिकर दिए जाएंगे। मामले की पैरवी डीजीसी फौजदारी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।
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मामले के अनुसार गंगोलीहाट का टिम्टा निवासी सुमितानंद मार्च 2019 में एक नाबालिग को अपने साथ हरिद्वार, अमृतसर और दिल्ली ले गया। इस दौरान होटल में ठहरकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इस मामले में पीड़िता के परिजनों की ओर से गंगोलीहाट थाने में सुमितानंद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। यह मामला विशेष सत्र न्यायालय में चला। मामले में पीड़िता और उसके माता-पिता सहित कुल आठ गवाह परीक्षित कराए गए।
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विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोष सिद्ध करते हुए बृहस्पतिवार को सजा सुनाई। आईपीसी की धारा 363 के तहत सुमितानंद को सात साल के कठोर कारावास और 10 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। धारा 366 के लिए 10 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड नहीं देने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
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इसके अलावा धारा 376 (2)(झ)(3) के अपराध के लिए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड नहीं देने पर पांच वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। न्यायाधीश ने कहा कि यदि अभियुक्त जुर्माना की धनराशि जमा करता है तो उसमें से 60 हजार रुपये पीड़िता को बतौर प्रतिकर दिए जाएंगे। मामले की पैरवी डीजीसी फौजदारी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।