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सेना के जवानों के लिए बच्चे तैयार करने लगे नववर्ष के कार्ड
Updated Sat, 02 Dec 2017 10:18 PM IST
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पिथौरागढ़। घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी ने इस बार सैनिकों के लिए नववर्ष के कार्ड बनाने की जिम्मेदारी उन बच्चों को सौंप दी है जो शनिदान या भीख मांगने के लिए दिनभर शहर में घूमते हैं। ये बच्चे क्रिसमस के कार्ड भी बना रहे हैं। तीन दिन के भीतर 12 बच्चों ने 100 कार्ड बना लिए हैं। यह कार्ड इस महीने की 15 तारीख तक सीमा पर तैनात जवानों के लिए उनकी यूनिट कमांडर को भेज दिए जाएंगे।
करुणा खर्कवाल और पूजा बच्चों से यह काम करा रही हैं। उन्होंने बताया कि नए तरह का काम करने से बच्चों में उत्साह है। बच्चों के अंदर रचनात्मक सोच लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। उनका कहना है कि ऐसे आयोजनों से बच्चों का कौशल विकास होगा और वह पढ़ने के लिए भी प्रेरित होंगे। पिछले वर्ष भी इस संस्था ने जवानों के लिए बच्चों के हाथों तैयार नववर्ष कार्ड भिजवाए थे। रक्षाबंधन पर राखियां भेजी थी। सोसायटी के अध्यक्ष अजय चंद्र ओली ने आम जनता से भी सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे गलत माहौल से बच जाएं तो उनके बचपन की सुरक्षा का यही सबसे बड़ा काम होगा। वह सड़कों पर घूमने वाले बच्चों को इसी तरह काम में लगाने और पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह अभियान लगातार जारी रहेगा। बताया गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार के मजदूर अपने बच्चों को साथ लाते हैं लेकिन स्कूल भेजने के बजाय उनको भीख मांगने के लिए भेज देते हैं।
करुणा खर्कवाल और पूजा बच्चों से यह काम करा रही हैं। उन्होंने बताया कि नए तरह का काम करने से बच्चों में उत्साह है। बच्चों के अंदर रचनात्मक सोच लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। उनका कहना है कि ऐसे आयोजनों से बच्चों का कौशल विकास होगा और वह पढ़ने के लिए भी प्रेरित होंगे। पिछले वर्ष भी इस संस्था ने जवानों के लिए बच्चों के हाथों तैयार नववर्ष कार्ड भिजवाए थे। रक्षाबंधन पर राखियां भेजी थी। सोसायटी के अध्यक्ष अजय चंद्र ओली ने आम जनता से भी सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे गलत माहौल से बच जाएं तो उनके बचपन की सुरक्षा का यही सबसे बड़ा काम होगा। वह सड़कों पर घूमने वाले बच्चों को इसी तरह काम में लगाने और पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह अभियान लगातार जारी रहेगा। बताया गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार के मजदूर अपने बच्चों को साथ लाते हैं लेकिन स्कूल भेजने के बजाय उनको भीख मांगने के लिए भेज देते हैं।
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