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पिथौरागढ़ से भी गया था स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव
Updated Fri, 23 Jun 2017 10:44 PM IST
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पिथौरागढ़ से भी गया था स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव
पिथौरागढ़। देश में स्मार्ट सिटी बनाने की चर्चा के दौरान पिथौरागढ़ से भी प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार के शहरी विकास मंत्रालय को भेजा गया था। पूर्व एसडीएम अनुराग आर्य ने स्मार्ट सिटी के मामले में गहरी रुचि दिखाई थी।
स्मार्ट सिटी के लिए यातायात का प्लान, पार्किंग, एक स्थान पर एक ही तरह की दुकानों का निर्माण, हर हिस्से तक सड़क संपर्क, पानी के निकास के लिए नालियों का निर्माण, लोगों के मनोरंजन के लिए पार्क निर्माण जैसे प्रस्ताव स्मार्ट सिटी के लिए तैयार किए गए थे। बाकायदा इसके लिए शहर में सर्वे भी किया गया। स्मार्ट सिटी का ब्ल्यू प्रिंट तैयार कर उसे शासन को भेजा गया था।
केंद्र सरकार ने प्रदेश में सिर्फ एक ही शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा देने का फैसला लिया है। इससे कम से कम पिथौरागढ़ के लोगों को निराशा हुई है। यहां के लोगों को उम्मीद थी कि स्मार्ट सिटी बनने से शायद शहर की दशा सुधर जाएगी। वर्तमान एसडीएम एसके पांडे का कहना है कि स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव शहरी विकास विभाग को भेजा गया था। वह तो यहां तक कहते हैं कि स्मार्ट सिटी के लिए पिथौरागढ़ का दावा बेहद मजबूत था। किन कारणों से इसका चयन नहीं हो पाया, इसकी जानकारी नहीं है।
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इस समय 15 वार्ड वाली नगरपालिका
पिथौरागढ़। शहर की व्यवस्था इस समय नगरपालिका देखती है। 15 वार्ड वाली नगरपालिका के अंतर्गत करीब 60 हजार लोग निवास करते हैं। रोज गांवों से करीब 40 हजार लोग यहां पहुंचते हैं। पर्वतीय अंचल में यह सबसे विस्तृत भूभाग में फैला हुआ शहर है। करीब 10 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले इस शहर का लगातार विकास हो रहा है।
नगर निगम का प्रस्ताव शासन को गया
पिथौरागढ़। सरकार ने पिथौरागढ़ नगरपालिका को उच्चीकृत कर नगर निगम का दर्जा देने का फैसला लिया है। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी खीमानंद जोशी ने बताया कि नगर निगम में शामिल किए जाने वाले गांवों की सूची शहरी विकास मंत्रालय को भेज दी है। हालांकि कई गांवों के लोग नगर निगम में शामिल करने का विरोध कर रहे हैं। अब शहरी विकास मंत्रालय आपत्तियां मांगेगा।
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पिथौरागढ़। देश में स्मार्ट सिटी बनाने की चर्चा के दौरान पिथौरागढ़ से भी प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार के शहरी विकास मंत्रालय को भेजा गया था। पूर्व एसडीएम अनुराग आर्य ने स्मार्ट सिटी के मामले में गहरी रुचि दिखाई थी।
स्मार्ट सिटी के लिए यातायात का प्लान, पार्किंग, एक स्थान पर एक ही तरह की दुकानों का निर्माण, हर हिस्से तक सड़क संपर्क, पानी के निकास के लिए नालियों का निर्माण, लोगों के मनोरंजन के लिए पार्क निर्माण जैसे प्रस्ताव स्मार्ट सिटी के लिए तैयार किए गए थे। बाकायदा इसके लिए शहर में सर्वे भी किया गया। स्मार्ट सिटी का ब्ल्यू प्रिंट तैयार कर उसे शासन को भेजा गया था।
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केंद्र सरकार ने प्रदेश में सिर्फ एक ही शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा देने का फैसला लिया है। इससे कम से कम पिथौरागढ़ के लोगों को निराशा हुई है। यहां के लोगों को उम्मीद थी कि स्मार्ट सिटी बनने से शायद शहर की दशा सुधर जाएगी। वर्तमान एसडीएम एसके पांडे का कहना है कि स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव शहरी विकास विभाग को भेजा गया था। वह तो यहां तक कहते हैं कि स्मार्ट सिटी के लिए पिथौरागढ़ का दावा बेहद मजबूत था। किन कारणों से इसका चयन नहीं हो पाया, इसकी जानकारी नहीं है।
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इस समय 15 वार्ड वाली नगरपालिका
पिथौरागढ़। शहर की व्यवस्था इस समय नगरपालिका देखती है। 15 वार्ड वाली नगरपालिका के अंतर्गत करीब 60 हजार लोग निवास करते हैं। रोज गांवों से करीब 40 हजार लोग यहां पहुंचते हैं। पर्वतीय अंचल में यह सबसे विस्तृत भूभाग में फैला हुआ शहर है। करीब 10 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले इस शहर का लगातार विकास हो रहा है।
नगर निगम का प्रस्ताव शासन को गया
पिथौरागढ़। सरकार ने पिथौरागढ़ नगरपालिका को उच्चीकृत कर नगर निगम का दर्जा देने का फैसला लिया है। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी खीमानंद जोशी ने बताया कि नगर निगम में शामिल किए जाने वाले गांवों की सूची शहरी विकास मंत्रालय को भेज दी है। हालांकि कई गांवों के लोग नगर निगम में शामिल करने का विरोध कर रहे हैं। अब शहरी विकास मंत्रालय आपत्तियां मांगेगा।