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भेषज संघ को मिला कीड़ाजड़ी खरीदने का अधिकार
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:30 PM IST
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पिथौरागढ़। भेषज सहकारी संघों को कीड़ाजड़ी (यारसा गम्बू) खरीदने का अधिकार मिल गया है। कीड़ाजड़ी को वन उपज माना गया है। इसे खरीदने का अधिकार मिलने से इसके रोजगार से जुड़े लोगों को दिक्कत नहीं होगी।
जिला भेषज सहकारी संघ के अध्यक्ष पीतांबर पंत ने बताया कि वित्त मंत्री प्रकाश पंत के सहयोग से भेषज संघों को शासन की ओर से आठ अक्तूबर से कीड़ाजड़ी खरीदने का अधिकार मिल गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में कीड़ाजड़ी संग्रहण को सुव्यवस्थित तरीके से विनियमित कर स्थानीय लोगों को लाभ दिलाया जाएगा। कहा कि दोहन और परिवहन के लिए परमिट, रमन्ना आदि की कोई व्यवस्था नहीं होने से कीड़ाजड़ी संग्रहणकर्ताओं और व्यापारियों को काफी कठिनाई हो रही थी।
उनकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए वन अधिनियम 1927 की धारा दो की उपधारा के अंतर्गत कीड़ाजड़ी को वन उपज माना गया है। शासन द्वारा भेषज सहकारी संघों को क्रय एजेंसी के रूप में मान्यता दी गई है। उन्होंने कीड़ाजड़ी को संग्रह करने वाले लोगों से उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए संघ से संपर्क करने का अनुरोध किया है।
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जिला भेषज सहकारी संघ के अध्यक्ष पीतांबर पंत ने बताया कि वित्त मंत्री प्रकाश पंत के सहयोग से भेषज संघों को शासन की ओर से आठ अक्तूबर से कीड़ाजड़ी खरीदने का अधिकार मिल गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में कीड़ाजड़ी संग्रहण को सुव्यवस्थित तरीके से विनियमित कर स्थानीय लोगों को लाभ दिलाया जाएगा। कहा कि दोहन और परिवहन के लिए परमिट, रमन्ना आदि की कोई व्यवस्था नहीं होने से कीड़ाजड़ी संग्रहणकर्ताओं और व्यापारियों को काफी कठिनाई हो रही थी।
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उनकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए वन अधिनियम 1927 की धारा दो की उपधारा के अंतर्गत कीड़ाजड़ी को वन उपज माना गया है। शासन द्वारा भेषज सहकारी संघों को क्रय एजेंसी के रूप में मान्यता दी गई है। उन्होंने कीड़ाजड़ी को संग्रह करने वाले लोगों से उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए संघ से संपर्क करने का अनुरोध किया है।
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