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सेना भर्ती में ठगी का पहला मामला आया पकड़ में
Updated Sun, 26 Nov 2017 10:26 PM IST
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पिथौरागढ़। सेना भर्ती में ठगी का पहला मामला यहां पकड़ में आया है, लेकिन पुलिस की पूछताछ से यह जानकारी मिलती है कि पिछले साल भी इसी तरह छह युवा ठगी का शिकार हुए थे, लेकिन तब किसी ने भी इस आशय की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी।
पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि ठगी के धंधे में लगे लोग पहले उन युवाओं पर डोरे डालने का काम करते थे जो शारीरिक परीक्षण और चिकित्सा परीक्षण में बिना किसी बाधा के पास हो जाते थे। उसके बाद इतना तय रहता था कि ऐसे युवा लिखित परीक्षा को भी पास कर देंगे। यह बात अलग है कि ठगों का गिरोह पहले पैसा लेने के बजाय युवाओं के अभिलेखों को अपने पास जमा करा लेते थे।
जो युवा भर्ती हो जाता, उसके अभिलेख तभी वापस किए जाते जब वह निर्धारित किए गए सौदे की धनराशि को जमा करेगा। युवाओं की मजबूरी को पकड़ने में इन शातिरों ने खासा दिमाग लगाया था। पुलिस की पड़ताल के अनुसार पिछले साल जो छह युवा इन ठगों का शिकार हुए थे, उनसे ठगों ने 15 लाख रुपये ऐंठ लिए थे और कमीशन की राशि आपस में बांट दी थी। इस बार की भर्ती के समय दस युवाओं के अभिलेखों के मिलने से यह स्पष्ट होता है कि ठगों ने दस युवाओं को अपने जाल में फांस दिया था। अलबत्ता किसी से अभी रकम नहीं ली थी।
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युवाओं की मजबूरी को पकड़ने का तरीका ठगों के पास बेहद आसान था। लिखित परीक्षा में पास होने वाले युवा को भर्ती ज्वाइन करते समय अपने मूल प्रमाणपत्र दिखाने होते जो इन ठगों के कब्जे में थे। उन कागजों को निकालने के लिए ही यह रुपये ऐंठते थे। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं। अभी पूछताछ में पता चलेगा कि यह धंधा कब से चल रहा था और कितने लोग ठगी का शिकार हुए हैं।
इस बार कुछ युवाओं द्वारा दिखाए गए साहस के बाद ही यह मामला पकड़ में आया है। पुलिस अधीक्षक अजय जोशी का कहना है कि पुलिस इस मामले की तह तक जाएगी और सारा खुलासा करेगी। गिरोह के तीन लोगों के पकड़े जाने से पूरे रैकेट का पता लगाने में आसानी होगी।
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पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि ठगी के धंधे में लगे लोग पहले उन युवाओं पर डोरे डालने का काम करते थे जो शारीरिक परीक्षण और चिकित्सा परीक्षण में बिना किसी बाधा के पास हो जाते थे। उसके बाद इतना तय रहता था कि ऐसे युवा लिखित परीक्षा को भी पास कर देंगे। यह बात अलग है कि ठगों का गिरोह पहले पैसा लेने के बजाय युवाओं के अभिलेखों को अपने पास जमा करा लेते थे।
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जो युवा भर्ती हो जाता, उसके अभिलेख तभी वापस किए जाते जब वह निर्धारित किए गए सौदे की धनराशि को जमा करेगा। युवाओं की मजबूरी को पकड़ने में इन शातिरों ने खासा दिमाग लगाया था। पुलिस की पड़ताल के अनुसार पिछले साल जो छह युवा इन ठगों का शिकार हुए थे, उनसे ठगों ने 15 लाख रुपये ऐंठ लिए थे और कमीशन की राशि आपस में बांट दी थी। इस बार की भर्ती के समय दस युवाओं के अभिलेखों के मिलने से यह स्पष्ट होता है कि ठगों ने दस युवाओं को अपने जाल में फांस दिया था। अलबत्ता किसी से अभी रकम नहीं ली थी।
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युवाओं की मजबूरी को पकड़ने का तरीका ठगों के पास बेहद आसान था। लिखित परीक्षा में पास होने वाले युवा को भर्ती ज्वाइन करते समय अपने मूल प्रमाणपत्र दिखाने होते जो इन ठगों के कब्जे में थे। उन कागजों को निकालने के लिए ही यह रुपये ऐंठते थे। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं। अभी पूछताछ में पता चलेगा कि यह धंधा कब से चल रहा था और कितने लोग ठगी का शिकार हुए हैं।
इस बार कुछ युवाओं द्वारा दिखाए गए साहस के बाद ही यह मामला पकड़ में आया है। पुलिस अधीक्षक अजय जोशी का कहना है कि पुलिस इस मामले की तह तक जाएगी और सारा खुलासा करेगी। गिरोह के तीन लोगों के पकड़े जाने से पूरे रैकेट का पता लगाने में आसानी होगी।