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पंचेश्वर बांध:विस्थापन नीति के प्रारूप का पता नहीं
Updated Mon, 08 Jan 2018 11:22 PM IST
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Kishau Dam
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पंचेश्वर बांध के निर्माण के लिए प्रारंभिक स्तर के सर्वेक्षण का काम शुरू हो गया है लेकिन विस्थापित होने वाले 33 हजार परिवारों के लिए न तो नीति बनी है और न प्रारूप बन पाया है। बांध निर्माण की प्रक्रिया में तेजी के साथ ही लोगों का संशय भी बढ़ने लगा है। पंचेश्वर घाटी संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर विस्थापन की नीति स्पष्ट करने की मांग की है।
समिति के संयोजक मनोज सिंह सामंत, अध्यक्ष मान सिंह सामंत ने पंचेश्वर के डूब क्षेत्र में आ रहे गांवों का दौरा किया। बताया कि पूरी घाटी में लोग कृषि, पशुपालन, बागवानी, शहद उत्पादन, वनों पर आधारित छोटे शिल्प से आजीविका चलाते हैं। लोग इस बात से आशंकित हैं कि विस्थापन के बाद उनका परंपरागत पेशा समाप्त हो जाएगा। जिस स्थान पर सरकार उनको बसाएगी वहां पर सिंचित खेती, जल, जंगल, जमीन जैसी सुविधाएं मिल पाना संभव नहीं है। प्रधानमंत्री को भेजे इस पत्र में प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम 30 लाख रुपये का आर्थिक पैकेज मांगा गया है ताकि वह विस्थापन की स्थिति में नए रोजगार की व्यवस्था कर सके। जमीन के मुआवजे के संदर्भ में कहा गया है कि जिला मुख्यालय में प्रचलित सर्किल रेट के आधार पर इसका वितरण हो ताकि यदि कोई परिवार जिला मुख्यालय में बसने का विकल्प रखे तो उसके सामने आर्थिक समस्या न हो। यह भी कहा गया है कि बांध के डूब क्षेत्र से बाहर करीब दो किमी की दूरी तक के इलाके को भी प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में रखा जाए। क्योंकि इन क्षेत्रों में भूस्खलन, दैवी आपदा, बादल फटने जैसी घटनाएं बढ़ेंगी। पत्र में मांग की गई है कि विस्थापित होने वाले परिवारों की इन मूलभूत समस्याओं का समय पर निस्तारण किया जाए।
पंचेश्वर बांध : विस्थापन नीति के प्रारूप का पता नहीं
डूब क्षेत्र से बाहर दो किमी की दूरी तक के इलाके में भूस्खलन की आशंका
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समिति के संयोजक मनोज सिंह सामंत, अध्यक्ष मान सिंह सामंत ने पंचेश्वर के डूब क्षेत्र में आ रहे गांवों का दौरा किया। बताया कि पूरी घाटी में लोग कृषि, पशुपालन, बागवानी, शहद उत्पादन, वनों पर आधारित छोटे शिल्प से आजीविका चलाते हैं। लोग इस बात से आशंकित हैं कि विस्थापन के बाद उनका परंपरागत पेशा समाप्त हो जाएगा। जिस स्थान पर सरकार उनको बसाएगी वहां पर सिंचित खेती, जल, जंगल, जमीन जैसी सुविधाएं मिल पाना संभव नहीं है। प्रधानमंत्री को भेजे इस पत्र में प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम 30 लाख रुपये का आर्थिक पैकेज मांगा गया है ताकि वह विस्थापन की स्थिति में नए रोजगार की व्यवस्था कर सके। जमीन के मुआवजे के संदर्भ में कहा गया है कि जिला मुख्यालय में प्रचलित सर्किल रेट के आधार पर इसका वितरण हो ताकि यदि कोई परिवार जिला मुख्यालय में बसने का विकल्प रखे तो उसके सामने आर्थिक समस्या न हो। यह भी कहा गया है कि बांध के डूब क्षेत्र से बाहर करीब दो किमी की दूरी तक के इलाके को भी प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में रखा जाए। क्योंकि इन क्षेत्रों में भूस्खलन, दैवी आपदा, बादल फटने जैसी घटनाएं बढ़ेंगी। पत्र में मांग की गई है कि विस्थापित होने वाले परिवारों की इन मूलभूत समस्याओं का समय पर निस्तारण किया जाए।
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पंचेश्वर बांध : विस्थापन नीति के प्रारूप का पता नहीं
डूब क्षेत्र से बाहर दो किमी की दूरी तक के इलाके में भूस्खलन की आशंका