फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   16 new families settled within 10 years in Gol village

गोल गांव में दस वर्ष के भीतर 16 नए परिवार बसे

Thu, 16 Nov 2017 10:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
ब्यूरो/अमर उजाला, थल Updated Thu, 16 Nov 2017 10:25 PM IST
विज्ञापन
16 new families settled within 10 years in Gol village
थल घाटी का गोल गांव - फोटो : अमर उजाला

पहाड़ों से पलायन के शोर के बीच एक सुकून देने वाला संकेत थल के पास गोल गांव से मिला है। इस गांव से पलायन की बजाय यहां पिछले दस साल में 16 नए परिवार आकर बस गए हैं। अभी कई परिवारों ने मकान बनाने के लिए जमीन खरीदी है। गोल गांव में पहले 65 परिवार रहते थे। अब यह संख्या बढ़कर 81 हो गई है। 

विज्ञापन


गांव की सीमा पर थल का राजकीय इंटर कॉलेज है। गोल गांव में दो पब्लिक स्कूल हैं। गांव तक जाने के लिए सड़क बनी है। पेयजल की कोई समस्या नहीं है। प्राकृतिक स्रोत से सालभर पर्याप्त पानी मिलता है। सामने रामगंगा नदी बहती है। गर्मियों में यदि पानी की कमी होने लगी तो लोग रामगंगा से पानी की व्यवस्था कर लेते हैं।
विज्ञापन


गोल गांव में पहाड़ के अन्य गांवों की तुलना में बेहतर सुविधाएं होने के कारण लेजम, दड़मोली, गडेरा, कौली, कमद गांव के लोगों ने जमीन खरीदनी शुरू की। पहाड़ के कस्बों और नगरों की तुलना में गांव की जमीन ज्यादा महंगी नहीं है। गांव के लोग पशुपालन, सब्जी उत्पादन करते हैं। इस सामग्री को बेचने का कोई संकट उनके सामने नहीं रहता। कुछ सामग्री तो गांव में ही बिक जाती है और कुछ सामग्री को लोग थल बाजार लेकर आते हैं। करीब 80 हेक्टेयर जमीन पर लोग फसल पैदा करते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


गांव के लोगों ने बताया कि यदि पहाड़ के गांवों में थोड़ी सुविधा हो जाए तो पलायन जैसी समस्या आ ही नहीं सकती। गोल गांव इसका उदाहरण है। बताया गया है कि गोल गांव में मकान बनाने के लिए 15 और लोगों ने जमीन खरीदी है। बच्चों की पढ़ाने के लिए 25 परिवार किराए के कमरों में रहते हैं। गोल गांव से अब तक किसी भी परिवार ने पलायन नहीं किया है। लोग गांव में उपलब्ध संसाधनों से बेहतरीन ढंग से आजीविका चला रहे हैं।


सुविधा होने पर कौन छोड़ेगा गांव
गोल गांव निवासी लीला टम्टा और भगत राम का कहना है कि यदि थोड़ी सी सुविधा हो तो कोई भी व्यक्ति अपना गांव छोड़ने का विचार नहीं ला सकता। वह कहती हैं कि गोल गांव में स्कूल, सड़क की सुविधा है। इस कारण किसी को भी कठिनाई नहीं है। खेतीबाड़ी, सब्जी उत्पादन, दुग्ध उत्पादन से लोग आजीविका चला लेते हैं। कुछ लोग नौकरी में भी हैं, लेकिन उनका गांव छोड़कर जाने का कोई इरादा नहीं है। भगत राम का कहना है कि निम्न आय वर्ग वाले इस गांव के लोग कम आमदनी में भी ठीक से जीवन जी रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed