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महिला अस्पताल की डाक्टर समेत पांच के खिलाफ होगी कार्रवाई
Updated Sat, 02 Dec 2017 10:18 PM IST
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पिथौरागढ़। जिला महिला अस्पताल में 23 अक्तूबर को प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई थी। डॉक्टर और कर्मचारियों पर पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार और लापरवाही बरतने का आरोप लगा था। इस मामले की जांच के बाद डीएम सी रविशंकर ने महिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर और चार अन्य कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। डीएम के आदेश पर इस प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच भी हो रही है।
नगर से सटे सेरा गांव निवासी रोहित मेहता की पत्नी ममता मेहता को 23 अक्तूबर को प्रसव पीड़ा होने पर महिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉ. कर्णिका पंत ने प्रसव पीड़िता पर ध्यान नहीं दिया। आरोप है कि अस्पताल में कार्यरत उपचारिका मीना गुप्ता, अंजली सिंह, वार्ड आया माया राणा, स्वच्छक समता ने प्रसव पीड़िता के साथ गलत व्यवहार किया। सीएमओ डॉ. उषा गुंज्याल ने चार सदस्यों की कमेटी बनाकर इस मामले की जांच की थी। सभी पक्षों से लिए गए बयान के आधार पर उक्त कर्मचारियों को दोषी पाया गया है। डीएम ने बताया कि इन कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजा गया है। सीएमओ से कहा गया है कि वह अपने स्तर से भी इस मामले में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखें। इधर, पीड़ित परिवार ने इस प्रकरण पर उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। परिजन मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग तक इस मामले को पहुंचाने की तैयारी में हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के साथ गलत व्यवहार करने वाले कर्मचारियों को सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो।
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नगर से सटे सेरा गांव निवासी रोहित मेहता की पत्नी ममता मेहता को 23 अक्तूबर को प्रसव पीड़ा होने पर महिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉ. कर्णिका पंत ने प्रसव पीड़िता पर ध्यान नहीं दिया। आरोप है कि अस्पताल में कार्यरत उपचारिका मीना गुप्ता, अंजली सिंह, वार्ड आया माया राणा, स्वच्छक समता ने प्रसव पीड़िता के साथ गलत व्यवहार किया। सीएमओ डॉ. उषा गुंज्याल ने चार सदस्यों की कमेटी बनाकर इस मामले की जांच की थी। सभी पक्षों से लिए गए बयान के आधार पर उक्त कर्मचारियों को दोषी पाया गया है। डीएम ने बताया कि इन कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजा गया है। सीएमओ से कहा गया है कि वह अपने स्तर से भी इस मामले में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखें। इधर, पीड़ित परिवार ने इस प्रकरण पर उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। परिजन मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग तक इस मामले को पहुंचाने की तैयारी में हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के साथ गलत व्यवहार करने वाले कर्मचारियों को सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो।
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