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रोडवेज चालकों की मनमानी से भड़के युवा, प्रदर्शन
Updated Thu, 19 Apr 2018 11:04 PM IST
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। रोडवेज बस चालक सवारियों को स्टेशन से बैठाने, उतारने के स्थान पर एक किमी दूर अस्कोट तिराहे पर उतार दे रहे हैं, इससे भड़के युवाओं ने बृहस्पतिवार को रोडवेज प्रबंधन और चालकों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
सामाजिक कार्यकर्ता तनुज पाल के नेतृत्व में अस्कोट बाजार में एकत्र युवाओं ने रोडवेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पाल ने कहा कि सवारियों को अस्कोट तिराहे पर उतारा जाता है। रोडवेज की बस अस्कोट बाजार में आती ही नहीं हैं। इस कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बस पकड़ने के लिए तिराहे पर सामान के साथ जाना पड़ता है। बाहर से अस्कोट लौटने वाले लोगों को तिराहे से अस्कोट बाजार तक सामान ढोना पड़ता है।
प्रदर्शन में शामिल प्रकाश पाल, विकास भंडारी, मनोज लुंठी, जगत मुनौला, भुवन कुंवर, दिनेश चंद, विजय भंडारी, विमल टम्टा, राम सिंह पाल का कहना था कि रोडवेज बसों में किराया तो अस्कोट तक का लिया जाता है, लेकिन सवारियों को तिराहे पर उतार दिया जाता है। एक साल से इस तरह की मनमानी चल रही है। कहा कि यदि अस्कोट बाजार में बस नहीं आती हैं तो आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।
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बीमार मां को कंधे पर ढोना पड़ा
अस्कोट निवासी प्रकाश पाल ने बताया कि वह बुधवार को दिल्ली से अपनी मां कलावती देवी का इलाज कराकर लौटे। दिल्ली से धारचूला जा रही बस से शाम करीब साढ़े पांच बजे उनको तिराहे पर उतार दिया। उन्होंने बीमार मां का हवाला दिया, लेकिन बस चालक और परिचालक का दिल नहीं पसीजा। वह बीमार मां और सामान को एक किमी कंधे पर ढोकर लाए। छुट्टी पर घर आए खोलियागांव निवासी फौजी पवन कुमार पाल ने बताया कि टनकपुर-धारचूला बस से रात आठ बजे उन्हें अस्कोट तिराहे पर उतार दिया। उनके पास काफी सामान था, वह जैसे-तैसे घर तक सामान लाए।
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सामाजिक कार्यकर्ता तनुज पाल के नेतृत्व में अस्कोट बाजार में एकत्र युवाओं ने रोडवेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पाल ने कहा कि सवारियों को अस्कोट तिराहे पर उतारा जाता है। रोडवेज की बस अस्कोट बाजार में आती ही नहीं हैं। इस कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बस पकड़ने के लिए तिराहे पर सामान के साथ जाना पड़ता है। बाहर से अस्कोट लौटने वाले लोगों को तिराहे से अस्कोट बाजार तक सामान ढोना पड़ता है।
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प्रदर्शन में शामिल प्रकाश पाल, विकास भंडारी, मनोज लुंठी, जगत मुनौला, भुवन कुंवर, दिनेश चंद, विजय भंडारी, विमल टम्टा, राम सिंह पाल का कहना था कि रोडवेज बसों में किराया तो अस्कोट तक का लिया जाता है, लेकिन सवारियों को तिराहे पर उतार दिया जाता है। एक साल से इस तरह की मनमानी चल रही है। कहा कि यदि अस्कोट बाजार में बस नहीं आती हैं तो आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।
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बीमार मां को कंधे पर ढोना पड़ा
अस्कोट निवासी प्रकाश पाल ने बताया कि वह बुधवार को दिल्ली से अपनी मां कलावती देवी का इलाज कराकर लौटे। दिल्ली से धारचूला जा रही बस से शाम करीब साढ़े पांच बजे उनको तिराहे पर उतार दिया। उन्होंने बीमार मां का हवाला दिया, लेकिन बस चालक और परिचालक का दिल नहीं पसीजा। वह बीमार मां और सामान को एक किमी कंधे पर ढोकर लाए। छुट्टी पर घर आए खोलियागांव निवासी फौजी पवन कुमार पाल ने बताया कि टनकपुर-धारचूला बस से रात आठ बजे उन्हें अस्कोट तिराहे पर उतार दिया। उनके पास काफी सामान था, वह जैसे-तैसे घर तक सामान लाए।