{"_id":"5c12967b42c7925d795c4722","slug":"121544722043-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"झाड़फूंक, गंतुवापन और जादू टोना पर मांगी सूचना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झाड़फूंक, गंतुवापन और जादू टोना पर मांगी सूचना
Updated Thu, 13 Dec 2018 10:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
थल (पिथौरागढ़)। देवी-देवताओं का वास कहे जाने के कारण उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। इसकी आड़ में कुछ लोग झाड़फूंक, गंतुवापन और टोटकों से कई लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। इससे न केवल धन की बर्बादी होती है, बल्कि कई लोग अवसाद में आकर अपना मानसिक संतुलन भी खो बैठते हैं।
पहाड़ पर इसका प्रचलन लगातार बढ़ने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाने से आहत तड़ीगांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता भानी चंद निवासी ने महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तराखंड देहरादून से छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी।
उन्होंने इन झाड़फूंक, जादूटोना और गंतुवा करने वालों को संबंधित विभाग से पंजीकृत करने की अनिवार्यता के तहत पूछा था। इसके जवाब में महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लोक सूचना अधिकारी ने कोई सूचना वांछित नहीं होने और अभिलिखित नहीं होने की जानकारी दी। विभाग ने उन्हें केवल नैदानिक स्थापनों का रजिस्ट्रीकरण होने की बात कही हैं।
विज्ञापन
पूर्व सूबेदार भानीचंद समय-समय पर समाज की कुरीतियों सहित अन्य ज्वलंत मुद्दों पर सूचना मांग चुके हैं। उन्होंने पूर्व में बंदरों के कारण पहाड़ की खेती प्रभावित होने का मामला भी उठाया था। भानीचंद का कहना है कि समाज से झाड़फूंक, जादू टोना, अंधविश्वास जैसी कुरीतियों को मिटाने के लिए सरकार को कड़े नियम बनाने की जरूरत है।
विज्ञापन
पहाड़ पर इसका प्रचलन लगातार बढ़ने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाने से आहत तड़ीगांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता भानी चंद निवासी ने महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तराखंड देहरादून से छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी।
विज्ञापन
उन्होंने इन झाड़फूंक, जादूटोना और गंतुवा करने वालों को संबंधित विभाग से पंजीकृत करने की अनिवार्यता के तहत पूछा था। इसके जवाब में महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लोक सूचना अधिकारी ने कोई सूचना वांछित नहीं होने और अभिलिखित नहीं होने की जानकारी दी। विभाग ने उन्हें केवल नैदानिक स्थापनों का रजिस्ट्रीकरण होने की बात कही हैं।
विज्ञापन
पूर्व सूबेदार भानीचंद समय-समय पर समाज की कुरीतियों सहित अन्य ज्वलंत मुद्दों पर सूचना मांग चुके हैं। उन्होंने पूर्व में बंदरों के कारण पहाड़ की खेती प्रभावित होने का मामला भी उठाया था। भानीचंद का कहना है कि समाज से झाड़फूंक, जादू टोना, अंधविश्वास जैसी कुरीतियों को मिटाने के लिए सरकार को कड़े नियम बनाने की जरूरत है।