{"_id":"5bbe39a0867a55283926c837","slug":"11539193248-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महज 11 हजार किसानों ने कराया फसलों का बीमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महज 11 हजार किसानों ने कराया फसलों का बीमा
Updated Wed, 10 Oct 2018 11:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। सीमांत जनपद में फसलों के बीमा के प्रति किसानों में जागरूकता नहीं है। पिथौरागढ़ जिले में 80 हजार किसानों में से महज 11 हजार किसानों ने ही फसलों का बीमा कराया है।
कृषि विभाग के अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्र में खरीफ में धान, मंडु़वा और रवि में गेहूं, मसूर की फसलें बीमा योजना के दायरे में हैं। इस वर्ष छह हजार किसानों ने ही धान एवं मंडु़वा की फसलों का बीमा कराया है, जबकि पांच हजार किसानों ने उद्यान विभाग के अंतर्गत आने वाली खरीफ की आलू, अदरक, टमाटर, फ्रैंचबीन और मिर्च का बीमा कराया है। जिले में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी की ओर से फसलों का बीमा किया जाता है।
कंपनी के फील्ड आफीसर एसके ऊंचाकोटी ने बताया धान में 7.70 रुपये, मंडु़वे का 8.80 रुपये प्रति नाली की दर से बीमा किया जाता है। ओलावृष्टि, सूखा, जंगली जानवरों द्वारा पहुंचाई गई क्षति आदि का आकलन किया जाता है। उन्होंने बताया कि फसलों का नुकसान होने पर किसान आवेदन करते हैं। उसके बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण किया जाता है। क्षति के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है। इसके अलावा क्राप कटिंग में औसत उत्पादन कम होने पर बीमा धारक को 10 प्रतिशत राहत राशि दी जाती है।
विज्ञापन
इन फसलों का होता है बीमा
फसलें- धान, मंडु़वा, गेहूं, मसूर।
सब्जी- आलू, अदरक, टमाटर, फ्रैंचबीन, मिर्च।
फसलों का बीमा किसानों के लिए लाभकारी है। अधिक से अधिक किसान फसलों का बीमा कराएं, इसके लिए समय-समय पर प्रचार-प्रसार कर किसानों को जागरूक किया जाता है। वर्तमान में सीमित फसलों का ही बीमा होता है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अन्य फसलों के भी बीमा के दायरे में आने से किसानों को काफी लाभ मिलेगा। -अमरेंद्र चौधरी, मुख्य कृषि अधिकारी, पिथौरागढ़
पहाड़ के किसान फसलों के उत्पादन के लिए मौसम पर निर्भर रहते हैं। सिंचित क्षेत्र बहुत कम है। मौसम की मार से किसान हतोत्साहित हो रहे हैं। जंगली जानवरों के कारण खेती करना कठिन हो रहा है। अब तक केवल धान, गेहूं, मंड़ुवा, मसूर की फसलों का ही बीमा होता था। अन्य नकदी फसलों का बीमा होने पर किसानों को लाभ मिलेगा। -सुभाष जोशी, अध्यक्ष, किसान संगठन पिथौरागढ़
विज्ञापन
कृषि विभाग के अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्र में खरीफ में धान, मंडु़वा और रवि में गेहूं, मसूर की फसलें बीमा योजना के दायरे में हैं। इस वर्ष छह हजार किसानों ने ही धान एवं मंडु़वा की फसलों का बीमा कराया है, जबकि पांच हजार किसानों ने उद्यान विभाग के अंतर्गत आने वाली खरीफ की आलू, अदरक, टमाटर, फ्रैंचबीन और मिर्च का बीमा कराया है। जिले में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी की ओर से फसलों का बीमा किया जाता है।
विज्ञापन
कंपनी के फील्ड आफीसर एसके ऊंचाकोटी ने बताया धान में 7.70 रुपये, मंडु़वे का 8.80 रुपये प्रति नाली की दर से बीमा किया जाता है। ओलावृष्टि, सूखा, जंगली जानवरों द्वारा पहुंचाई गई क्षति आदि का आकलन किया जाता है। उन्होंने बताया कि फसलों का नुकसान होने पर किसान आवेदन करते हैं। उसके बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण किया जाता है। क्षति के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है। इसके अलावा क्राप कटिंग में औसत उत्पादन कम होने पर बीमा धारक को 10 प्रतिशत राहत राशि दी जाती है।
विज्ञापन
इन फसलों का होता है बीमा
फसलें- धान, मंडु़वा, गेहूं, मसूर।
सब्जी- आलू, अदरक, टमाटर, फ्रैंचबीन, मिर्च।
फसलों का बीमा किसानों के लिए लाभकारी है। अधिक से अधिक किसान फसलों का बीमा कराएं, इसके लिए समय-समय पर प्रचार-प्रसार कर किसानों को जागरूक किया जाता है। वर्तमान में सीमित फसलों का ही बीमा होता है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अन्य फसलों के भी बीमा के दायरे में आने से किसानों को काफी लाभ मिलेगा। -अमरेंद्र चौधरी, मुख्य कृषि अधिकारी, पिथौरागढ़
पहाड़ के किसान फसलों के उत्पादन के लिए मौसम पर निर्भर रहते हैं। सिंचित क्षेत्र बहुत कम है। मौसम की मार से किसान हतोत्साहित हो रहे हैं। जंगली जानवरों के कारण खेती करना कठिन हो रहा है। अब तक केवल धान, गेहूं, मंड़ुवा, मसूर की फसलों का ही बीमा होता था। अन्य नकदी फसलों का बीमा होने पर किसानों को लाभ मिलेगा। -सुभाष जोशी, अध्यक्ष, किसान संगठन पिथौरागढ़