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बाबा की खोज में भटकते रहे स्वयंसेवी और पुलिस कर्मी
Updated Tue, 21 Nov 2017 10:18 PM IST
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बलुवाकोट/पिथौरागढ़। बलुवाकोट के जंगल में लंबे समय से रहने वाले एक बाबा के अचानक लापता होेने की सूचना पर परिवर्तन संस्था के लोग और बलुवाकोट पुलिस साढ़े पांच घंटे तक जंगल की खाक छानी। बाबा तो नहीं मिले, लेकिन बाबा के कपड़े, बर्तन और कुछ अन्य सामान जंगल में अवश्य मिला। दरअसल रविवार शाम जंगल से लौटी बलुवाकोट की कुछ महिलाओं ने परिवर्तन संस्था के लोगों को जंगल में बाबा के कपड़े आदि पड़े होने की जानकारी दी थी।
बाबा बद्रीनाथ उर्फ रामदेव (65-70) पिछले 15 सालों से बलुवाकोट इलाके के जंगल और गुफाओं में निवास करते हैं। वह अक्सर जौलजीबी, धारचूला, कनालीछीना तक जाते रहते थे। किसी अनहोनी की आशंका के चलते सोमवार सुबह संस्था ने थानाध्यक्ष महेश चंद्र को वाकये की जानकारी दी।
इस पर सुबह 9 बजे थानाध्यक्ष महेश चंद्र के नेतृत्व में पुलिस कर्मी बलुवाकोट डिग्री कॉलेज के ऊपर तीन किमी की दूरी पर स्थित पोखरी धुरा के जंगल को रवाना हुए। पुलिस दल के साथ संगठन के रोहित खाती, पूरन ग्वाल, राजेंद्र दरियाल, ललित चंद भी शामिल थे। काफी खोजबीन के बाद पहाड़ी पर दो पत्थरों के बीच बाबा का कंबल, कपड़े, बर्तन, चप्पल, लाठी आदि मिला। सामान संभालकर रखा गया था।
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किसी हादसे की आशंका से खोजबीन के लिए दल ने दोपहर ढाई बजे तक ढूंढ़खोज की, लेकिन दुर्घटना के कोई साक्ष्य नहीं मिले। अंदाजा लगाया जा रहा है कि बाबा किसी और जंगल की ओर चले गए होंगे।
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बाबा बद्रीनाथ उर्फ रामदेव (65-70) पिछले 15 सालों से बलुवाकोट इलाके के जंगल और गुफाओं में निवास करते हैं। वह अक्सर जौलजीबी, धारचूला, कनालीछीना तक जाते रहते थे। किसी अनहोनी की आशंका के चलते सोमवार सुबह संस्था ने थानाध्यक्ष महेश चंद्र को वाकये की जानकारी दी।
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इस पर सुबह 9 बजे थानाध्यक्ष महेश चंद्र के नेतृत्व में पुलिस कर्मी बलुवाकोट डिग्री कॉलेज के ऊपर तीन किमी की दूरी पर स्थित पोखरी धुरा के जंगल को रवाना हुए। पुलिस दल के साथ संगठन के रोहित खाती, पूरन ग्वाल, राजेंद्र दरियाल, ललित चंद भी शामिल थे। काफी खोजबीन के बाद पहाड़ी पर दो पत्थरों के बीच बाबा का कंबल, कपड़े, बर्तन, चप्पल, लाठी आदि मिला। सामान संभालकर रखा गया था।
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किसी हादसे की आशंका से खोजबीन के लिए दल ने दोपहर ढाई बजे तक ढूंढ़खोज की, लेकिन दुर्घटना के कोई साक्ष्य नहीं मिले। अंदाजा लगाया जा रहा है कि बाबा किसी और जंगल की ओर चले गए होंगे।