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नवजात की मौत के लिए नर्स और चिकित्सक जिम्मेदार
Updated Wed, 01 Nov 2017 10:51 PM IST
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पिथौैरागढ़। नगर के सेरा निवासी एक महिला ने जिला महिला अस्पताल के नर्सों एवं चिकित्सक पर प्रसव के दौरान लापरवाही बरतने और नर्सों द्वारा मारपीट करने का आरोप लगाया है। महिला ने इस बाबत डीएम सी रविशंकर को शिकायती पत्र सौंपा। महिला का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के कारण उसकी नवजात बच्ची की मौत हुई।
सेरा निवासी ममता मेहता ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में कहा कि 23 अक्तूबर की तड़के 4.30 बजे उसे उसकी सास आशा मेहता, ननद रुचि पोखरिया, पति रोहित मेहता उसका प्रसव कराने जिला महिला अस्पताल लाए। आरोप लगाया कि उस समय अस्पताल में कोई भी महिला चिकित्सक मौजूद नहीं थीं। नर्सों से उसे अस्पताल में भर्ती किया। अत्यधिक पीड़ा होने पर ननद ने नर्सों से चिकित्सक को बुलाने को कहा, लेकिन चिकित्सक नहीं आईं। नर्सों ने उससे घूमते रहने को कहा। इसके बाद 11.30 बजे चिकित्सक आईं और परीक्षण किया। उसके बाद किसी चिकित्सक ने उसे नहीं देखा, वह पीड़ा से तड़पती रहीं। शाम 6 बजे ड्यूटी में तैनात नर्सें लेबर रूम में ले गईं।
आरोप लगाया कि नार्मल डिलीवरी होने की बात कहकर 15 घंटे तक इंतजार कराया। शाम 7.45 बजे चिकित्सक आईं और 8.4 बजे डिलीवरी हुई। इसके बाद उसकी नवजात बच्ची का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। रात 12 बजे बच्ची को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल ले गए। 24 अक्तूबर को शाम 6.30 बजे बच्ची की मृत्यु हो गई। 27 अक्तूबर को इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी को इस संबंध में शिकायती पत्र दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने का भरोसा दिलाया है।
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उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ऊषा गुंज्याल का कहना है कि मामले की अस्पताल की सीएमएस डॉ. निर्मला पुनेठा और तीन डॉक्टरों का पैनल अलग-अलग जांच करेगा। इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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सेरा निवासी ममता मेहता ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में कहा कि 23 अक्तूबर की तड़के 4.30 बजे उसे उसकी सास आशा मेहता, ननद रुचि पोखरिया, पति रोहित मेहता उसका प्रसव कराने जिला महिला अस्पताल लाए। आरोप लगाया कि उस समय अस्पताल में कोई भी महिला चिकित्सक मौजूद नहीं थीं। नर्सों से उसे अस्पताल में भर्ती किया। अत्यधिक पीड़ा होने पर ननद ने नर्सों से चिकित्सक को बुलाने को कहा, लेकिन चिकित्सक नहीं आईं। नर्सों ने उससे घूमते रहने को कहा। इसके बाद 11.30 बजे चिकित्सक आईं और परीक्षण किया। उसके बाद किसी चिकित्सक ने उसे नहीं देखा, वह पीड़ा से तड़पती रहीं। शाम 6 बजे ड्यूटी में तैनात नर्सें लेबर रूम में ले गईं।
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आरोप लगाया कि नार्मल डिलीवरी होने की बात कहकर 15 घंटे तक इंतजार कराया। शाम 7.45 बजे चिकित्सक आईं और 8.4 बजे डिलीवरी हुई। इसके बाद उसकी नवजात बच्ची का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। रात 12 बजे बच्ची को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल ले गए। 24 अक्तूबर को शाम 6.30 बजे बच्ची की मृत्यु हो गई। 27 अक्तूबर को इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी को इस संबंध में शिकायती पत्र दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने का भरोसा दिलाया है।
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उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ऊषा गुंज्याल का कहना है कि मामले की अस्पताल की सीएमएस डॉ. निर्मला पुनेठा और तीन डॉक्टरों का पैनल अलग-अलग जांच करेगा। इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।