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पहले जानकारी होती तो जनसुनवाई में ही उठा देते मुद्दा
Updated Sat, 28 Oct 2017 10:48 PM IST
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पिथौरागढ़। पंचेश्वर बांध की आधिकारिक वेबसाइट में महाकाली की सहायक नदी सरयू का रास्ता गलत दिखाने पर महाकाली की आवाज संगठन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कहा है कि यदि पहले ऐसी जानकारी होती तो यह मुद्दा जनसुनवाई में प्रमुखता से उठाया जाता।
अमर उजाला ने 28 अक्तूबर के अंक में इस पर विस्तृत रिपोर्ट छापी है। रिपोर्ट छपने के बाद डूब क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर महाकाली के किनारे बसे गांव के लोगों को फोन और इंटरनेट की सुविधा नहीं दी है, ताकि वह वेबसाइट की खामियों को न पकड़ लें।
महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि पंचेश्वर बांध के संबंध में अब तक सरकार की ओर से जितने भी दस्तावेज और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सामने आई है, उनमें कई तरह की खामियां हैं। जितनी खामियां अब तक सामने आई हैं, उनका लगातार विरोध किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार का दस्तावेज कितना फर्जी है इसका प्रमाण इसी बात से मिल जाता है कि झूलाघाट और जौलजीबी की व्यापारिक मंडी को डूब क्षेत्र में नहीं दिखाया गया है। डूब क्षेत्र के गांवों के सर्वे के लिए कोई भी व्यक्ति नहीं पहुंचा।
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दिल्ली, देहरादून में बैठकर दस्तावेज और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर क्षेत्र के लोगों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में जौलजीबी का अंतरराष्ट्रीय झूलापुल भी आ रहा है, लेकिन इस पुल का कोई उल्लेख तक नहीं किया गया है। खड़ायत ने कहा कि भाजपा के नेता गांवों में घूमकर बांध परियोजना के लाभों का बखान तो कर रहे हैं, लेकिन दस्तावेजों में हुई खामियों का जिक्र तक नहीं करते। उन्होंने भाजपा के नेताओं से आग्रह किया है कि वह पहले बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का अध्ययन कर लें, उसके बाद ही गांवों में जाएं।
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अमर उजाला ने 28 अक्तूबर के अंक में इस पर विस्तृत रिपोर्ट छापी है। रिपोर्ट छपने के बाद डूब क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर महाकाली के किनारे बसे गांव के लोगों को फोन और इंटरनेट की सुविधा नहीं दी है, ताकि वह वेबसाइट की खामियों को न पकड़ लें।
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महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि पंचेश्वर बांध के संबंध में अब तक सरकार की ओर से जितने भी दस्तावेज और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सामने आई है, उनमें कई तरह की खामियां हैं। जितनी खामियां अब तक सामने आई हैं, उनका लगातार विरोध किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार का दस्तावेज कितना फर्जी है इसका प्रमाण इसी बात से मिल जाता है कि झूलाघाट और जौलजीबी की व्यापारिक मंडी को डूब क्षेत्र में नहीं दिखाया गया है। डूब क्षेत्र के गांवों के सर्वे के लिए कोई भी व्यक्ति नहीं पहुंचा।
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दिल्ली, देहरादून में बैठकर दस्तावेज और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर क्षेत्र के लोगों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में जौलजीबी का अंतरराष्ट्रीय झूलापुल भी आ रहा है, लेकिन इस पुल का कोई उल्लेख तक नहीं किया गया है। खड़ायत ने कहा कि भाजपा के नेता गांवों में घूमकर बांध परियोजना के लाभों का बखान तो कर रहे हैं, लेकिन दस्तावेजों में हुई खामियों का जिक्र तक नहीं करते। उन्होंने भाजपा के नेताओं से आग्रह किया है कि वह पहले बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का अध्ययन कर लें, उसके बाद ही गांवों में जाएं।