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कालीन की नई विधा सीखेंगे सीमांत के बुनकर
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धारचूला (पिथौरागढ़)। सीमांत के बुनकर कालीन की नई विधा को सीखेंगे। दुनिया में कालीन का बाजार तैयार करने वाली कालीन निर्यात संवर्धन परिषद यहां के चुनिंदा बुनकरों को नये रंग, नए डिजाइन के साथ ही कालीन की नव कला से परिचित कराएगी। रविवार को नगर पालिका अध्यक्ष राजेश्वरी देवी ने कार्यशाला का उद्घाटन किया।
केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा के प्रयासों से कालीन के प्रशिक्षण के लिए सीमांत धारचूला का चयन हुआ है। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की विंग कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) धारचूला की 40 बुनकरों को तीन माह का प्रशिक्षण देगी। निफ्ट के योग्य डिजाइनर बुनकरों को प्रशिक्षित करेंगे। पांच माह तक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के लिए पहले दिन 60 बुनकरों ने आवेदन किया। वस्त्र मंत्रालय की एक टीम इनमें से 40 बुनकर महिलाओं का चयन करेगी। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि यह सीमांत धारचूला के लिए खुशी की बात है। पुराने डिजाइन और रंगों के सही तालमेल नहीं होने के कारण हमारे कालीन को देश- विदेश के बाजार में जगह नहीं मिल पा रही थी। इस नयी तकनीक से बुनकरों की कला में नयापन आएगा। इस अवसर पर पूर्व सभासद राधा मर्तोलिया, उर्मिला कुटियाल, उर्मिला डाबरा, किरन, देवेंद्र आदि मौजूद थे।
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केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा के प्रयासों से कालीन के प्रशिक्षण के लिए सीमांत धारचूला का चयन हुआ है। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की विंग कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) धारचूला की 40 बुनकरों को तीन माह का प्रशिक्षण देगी। निफ्ट के योग्य डिजाइनर बुनकरों को प्रशिक्षित करेंगे। पांच माह तक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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प्रशिक्षण के लिए पहले दिन 60 बुनकरों ने आवेदन किया। वस्त्र मंत्रालय की एक टीम इनमें से 40 बुनकर महिलाओं का चयन करेगी। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि यह सीमांत धारचूला के लिए खुशी की बात है। पुराने डिजाइन और रंगों के सही तालमेल नहीं होने के कारण हमारे कालीन को देश- विदेश के बाजार में जगह नहीं मिल पा रही थी। इस नयी तकनीक से बुनकरों की कला में नयापन आएगा। इस अवसर पर पूर्व सभासद राधा मर्तोलिया, उर्मिला कुटियाल, उर्मिला डाबरा, किरन, देवेंद्र आदि मौजूद थे।
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