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Pithoragarh News: जर्जर हाल हुआ तीन जिलों को जोड़ने वाला 110 साल पुराना झूला पुल
Tue, 26 Mar 2024 09:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 26 Mar 2024 09:46 PM IST
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़-चंपावत और अल्मोड़ा जिले को जोड़ने वाला 110 वर्ष पुराना झूला पुल जर्जर हो गया है। एक शताब्दी पूर्व निर्मित इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए अभी तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
जब सरयू नदी को पार करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी तब ब्रिटिश काल में वर्ष 1914 में घाट के समीप इस झूला पुल का निर्माण किया गया। सड़क नहीं होने से पीलीभीत से पुल की पूरी सामग्री कंधों पर ढोकर यहां पहुंचाई गई थी। पुल बनने से पिथौरागढ़ से चंपावत, टनकपुर और अल्मोड़ा, हल्द्वानी के लिए आवागमन सुगम हो गया था। तब घोड़े, खच्चरों से राशन सहित अन्य सामग्री इसी पुल से पिथौरागढ़ पहुंचाई जाती थी।
वर्ष 1960 में सड़क बनने के बाद इस पुल का उपयोग कम हुआ। हालांकि गोगना सहित घाट क्षेत्र के कई गांवों के लोग आज भी घाट-पनार के बीच आवाजाही के लिए इसी पुल का उपयोग करते हैं। 110 साल से सरयू नदी पर खड़ा यह पुल जर्जर हो गया है। इस पुल के फर्श पर बिछाई गई लोहे और टिन की चादरें जर्जर हो चुकी हैं। पुल की दीवारों के पत्थरों को भी क्षति पहुंची है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता भुवन पांडेय का कहना है कि 110 साल से खड़ा यह पुल ऐतिहासिक धरोहर है। शासन-प्रशासन को इस पुल का सुधार कर इसका संरक्षण करना चाहिए।
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जब सरयू नदी को पार करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी तब ब्रिटिश काल में वर्ष 1914 में घाट के समीप इस झूला पुल का निर्माण किया गया। सड़क नहीं होने से पीलीभीत से पुल की पूरी सामग्री कंधों पर ढोकर यहां पहुंचाई गई थी। पुल बनने से पिथौरागढ़ से चंपावत, टनकपुर और अल्मोड़ा, हल्द्वानी के लिए आवागमन सुगम हो गया था। तब घोड़े, खच्चरों से राशन सहित अन्य सामग्री इसी पुल से पिथौरागढ़ पहुंचाई जाती थी।
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वर्ष 1960 में सड़क बनने के बाद इस पुल का उपयोग कम हुआ। हालांकि गोगना सहित घाट क्षेत्र के कई गांवों के लोग आज भी घाट-पनार के बीच आवाजाही के लिए इसी पुल का उपयोग करते हैं। 110 साल से सरयू नदी पर खड़ा यह पुल जर्जर हो गया है। इस पुल के फर्श पर बिछाई गई लोहे और टिन की चादरें जर्जर हो चुकी हैं। पुल की दीवारों के पत्थरों को भी क्षति पहुंची है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता भुवन पांडेय का कहना है कि 110 साल से खड़ा यह पुल ऐतिहासिक धरोहर है। शासन-प्रशासन को इस पुल का सुधार कर इसका संरक्षण करना चाहिए।
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