{"_id":"5b27f94a4f1c1bc96b8b6daf","slug":"101529346378-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विकसित किए जाएंगे गर्म पानी के स्रोत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विकसित किए जाएंगे गर्म पानी के स्रोत
Updated Tue, 19 Jun 2018 12:05 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
मदकोट(पिथौरागढ़)। मदकोट क्षेत्र में गोरी नदी किनारे स्थित 14 गर्म पानी के स्रोतों को विकसित किया जाएगा। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में इजाफा होगा। समय के साथ स्रोतों पर पड़ने वाले परिवर्तन पर कार्य कर रहे वैज्ञानिकों के अनुसार बीते 50 वर्षों में स्रोतों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एकेएल अस्थाना और डॉ. समीर तिवारी ने इन स्रोतों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से इन स्रोतों पर आधुनिक तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करने का कार्य किया जा रहा है। 1970 से 1990 तक भारतीय भूगर्भ संस्थान ने गोरी नदी किनारे फ्लेटी से सेराघाट तक मिले गर्म स्रोतों पर शोध किया। 50 वर्ष बाद भी यह स्रोत अपनी पूर्व स्थिति में ही हैं। इनके जल स्तर और तापमान में कोई भी परिवर्तन नहीं हुआ। वैज्ञानिकों को स्रोतों पर अलग-अलग तापमान मिला है। उन्होंने फ्लेटी से सेराघाट तक के क्षेत्र को जियोथर्मल जोन बताया है। भदेली में मिले स्रोत की क्षमता प्रति मिनट 200 लीटर पानी की है जो काफी ऊर्जा प्राप्त करने में सहायक होगी। तल्ला जोहार क्षेत्र में भी तीन स्रोत हैं। वैज्ञानिकों की टीम समय के साथ स्रोतों पर पड़ने वाले परिवर्तन पर कार्य कर रही है।
विज्ञापन
-55 डिग्री सेल्सियस तक है पानी का तापमान
वैज्ञानिकों ने बताया कि भूमि के अंदर लावा के मुहाने से जो गर्मी बाहर निकल रही है उसके साथ पानी मिल जाने से वह इन स्रोतों से प्रवाहित हो रही है। मदकोट में स्थित गर्म पानी के स्रोतों का तापमान 55 डिग्री सेल्सियस तक है। उन्होंने बताया कि यदि बोरिंग से एक किमी अंदर का पानी निकाला जाए तो 150 डिग्री सेल्सियस तक गर्म पानी प्राप्त किया जा सकता है। बताया कि इतनी ऊर्जा को हम घर या एक क्षेत्र विशेष को गर्म करने या रखने के साथ-साथ अन्य उपयोग में ला सकते हैं।
विज्ञापन
- हानिकारक हो सकता है स्रोतों के पानी का प्रयोग
वाडिया इंस्टीट्यूट के वैैैज्ञानिकों ने बताया कि गर्म पानी में बोरॉन, क्लोरीन, सल्फर, कैल्शियम, आर्सेनिक आदि खनिज पदार्थों की मात्रा सामान्य पानी से 20 फीसदी तक अधिक है। इसका ज्यादा उपयोग हानिकारक हो सकता है। गर्म पानी का उपयोग सही ढंग से करने पर गठिया, जोड़ों के दर्द, चर्म रोग से निजात मिल सकती है।
- स्रोतों की उपेक्षा पर जताई नाराजगी
डॉ. समीर तिवारी ने मदकोट स्थित गर्म पानी के स्रोत की उपेक्षा पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रकृति से मिले अमूल्य वरदान को सुरक्षित रखने के प्रयास न तो स्थानीय लोगों ने किया और न सरकार ने। उन्होंने स्रोत के आसपास फैली गंदगी पर भी नाराजगी जताई।