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जागो या भागो
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी
Updated Mon, 29 Jul 2013 08:19 AM IST
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बदरीनाथ हाईवे पर 30 साल पूर्व बसा बिराजकुंज कस्बा कभी गुलजार था अब वीरान होने को है। लगातार हो रही बारिश के बाद रौद्र रूप में आए सुनाली गदेरे ने कहर बरपा रखा है।
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कस्बे में हो रहे भूस्खलन ने लोगों को पलायन के लिए मजबूर कर दिया है। कई लोगों ने मकान, दुकान खाली कर दिए हैं, जो बचे हैं वे भी रात जागकर काट रहे हैं।
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सुनाली में बादल फटने से उफान पर आए सुनाली गदेरे के रौद्र रूप में बिराजकुंज की रौनक छीन ली है। यहां शिवप्रसाद के खेत खलियान सहित मकान बह गए हैं। कटाव से पूरा कस्बा ही खतरे की जद में आ गया।
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डर से सुरेंद्र प्रसाद ने मकान खाली कर दिया। तो एक दर्जन से अधिक दुकानदार दुकानें खाली कर अन्यत्र चले गए। कभी यात्रियों और स्थानीय ग्रामीणों से खचाखच रहने वाले बिराजकुंज में अब केवल गदेरे की सनसनाहट की डरावनी आवाज रह गई है।
बुधवार को गदेरे के उफान से दुकान के पीछे तक पानी और मलबा आ गया था। बारिश के डर से अब दुकान में दिन में भी डर लग रहा है। दोनों ओर से कटे इस कस्बे का अस्तित्व संकट में है। यहां कई दुकानें और मकान खाली हो गए हैं।
- विक्रम नेगी/देवी प्रसाद पंत, व्यवसायी बिराजकुंज
भूस्खलन से राजमार्ग की स्थिति खराब है और गांव भी इसकी जद में है। सेवानिवृत्त होने के बाद होटल इसलिए बनाया कि पलायन का दंश झेल रहे पहाड़ के लिए सीख दे सकें। कहर बनकर बरस रही बारिश ने स्थिति बिगाड़ दी है।
- जीबी पंत, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य/केदार होटल स्वामी बिरोली (भकुंडा)
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