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मंदिरों के निर्माण के लिए धरने पर ग्रामीण
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केशोराय मठ व अन्य पांच मंदिरों के नवनिर्माण समेत नौ सूत्री मांगों के लिए श्रीनगर बचाओ संघर्ष समिति ने क्षेत्रीय विधायक पर नगर की उपेक्षा का आरोप लगाया है। समिति के अध्यक्ष प्रेमदत्त नौटियाल ने कहा कि आपदा के आठ वर्ष बाद भी प्राचीन मठ और मंदिरों का निर्माण नहीं किया गया है। नगर की सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य भी अधूरा पड़ा है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में समिति के अध्यक्ष नौटियाल ने कहा कि जब केंद्र और राज्य सरकारें अयोध्या में राममंदिर, गुजरात में सोमनाथ आदि मंदिरों का निर्माण करवा सकती है तो उत्तराखंड के श्रीक्षेत्र में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित केशोरायमठ, दक्षिण शैली के लक्ष्मी नारायण मंदिर, हनुमान, दुर्गा, गंगा, गणेश मंदिरों के साथ ही सतसंघ भवन और महात्माओं की कुटियां का निर्माण क्यों नहीं कर सकती हैं। वर्ष 2013 की आपदा में केशोराय मठ समेत पांच अन्य मंदिर अलकनंदा नदी में बह गए थे लेकिन अब तक इन मठ मंदिरों का निर्माण नहीं करवाया गया है। वहीं सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई न किए जाने पर उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। धरना स्थल पर आशा बिष्ट, गोवर्द्धन गिरी, संजय राणा, सुनील रावत, पपू गिरी, सदानंद पुरी, दिनेश नेगी, भरत सिंह बिष्ट, कर्मराज सिंह सौंरियाल आदि मौजूद थे।
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शुक्रवार को मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में समिति के अध्यक्ष नौटियाल ने कहा कि जब केंद्र और राज्य सरकारें अयोध्या में राममंदिर, गुजरात में सोमनाथ आदि मंदिरों का निर्माण करवा सकती है तो उत्तराखंड के श्रीक्षेत्र में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित केशोरायमठ, दक्षिण शैली के लक्ष्मी नारायण मंदिर, हनुमान, दुर्गा, गंगा, गणेश मंदिरों के साथ ही सतसंघ भवन और महात्माओं की कुटियां का निर्माण क्यों नहीं कर सकती हैं। वर्ष 2013 की आपदा में केशोराय मठ समेत पांच अन्य मंदिर अलकनंदा नदी में बह गए थे लेकिन अब तक इन मठ मंदिरों का निर्माण नहीं करवाया गया है। वहीं सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई न किए जाने पर उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। धरना स्थल पर आशा बिष्ट, गोवर्द्धन गिरी, संजय राणा, सुनील रावत, पपू गिरी, सदानंद पुरी, दिनेश नेगी, भरत सिंह बिष्ट, कर्मराज सिंह सौंरियाल आदि मौजूद थे।
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