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Pauri News: सात साल पूर्व सड़क से जुड़ा गांव, सुविधा आज भी नहीं
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श्रीनगर। विकास खंड कीर्तिनगर के बंदासा और भैसवाड़ा गांव के लोगों की राह सड़क निर्माण के करीब सात वर्ष बाद भी आसान नहीं हो पाई है। ग्रामीण तंग और बदहाल मार्ग पर सफर करने से भी डर रहे हैं। जबकि गांव के अन्य तोकों में रहने वाले लोग सड़क सुविधा की राह ताक रहे हैं। वर्ष 2016 में बंदासा गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग ने मंजाकोट-बंदासा मोटर मार्ग निर्माण के लिए निविदा जारी कर कार्य शुरू करवाया। वर्ष 2017-18 में निर्माण कार्य पूरा होने पर मार्ग पर यातायात भी शुरू हो गया।
योजना थी कि मार्ग को बंदासा गांव के आगे पड़ने वाली बस्तियों से जोड़ते हुए सिल्काखाल मोटर मार्ग से लिंक किया जाए। जिससे सिल्काखाल क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों को कीर्तिनगर व श्रीनगर पहुंचने के लिए बिंदीघेरा का लंबा फेर नहीं लगाना पड़े। लेकिन विवाद के कारण मार्ग सिर्फ बंदासा गांव तक ही पहुंच पाया।
आज भी डंगल्डा और गल्या तोक में रहने वाले लोगाें को सड़क तक पहुंचने के लिए करीब एक से दो किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। गांव के लिए जो सड़क बनाई गई है वह अत्यधिक उबड़-खाबड़ और तंग है। जिस कारण गांव के लोग जान जोखिम में डालकर मार्ग पर सफर कर रहे है। स्थानीय लोग बताते है कि उनके गांव को सड़क से जोड़ा गया लेकिन सड़क जैसी सुविधा नहीं मिल पाई है। मार्ग इतना खतरनाक है कि कई लोग पैदल जाना ही पसंद करते है। संवाद
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योजना थी कि मार्ग को बंदासा गांव के आगे पड़ने वाली बस्तियों से जोड़ते हुए सिल्काखाल मोटर मार्ग से लिंक किया जाए। जिससे सिल्काखाल क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों को कीर्तिनगर व श्रीनगर पहुंचने के लिए बिंदीघेरा का लंबा फेर नहीं लगाना पड़े। लेकिन विवाद के कारण मार्ग सिर्फ बंदासा गांव तक ही पहुंच पाया।
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आज भी डंगल्डा और गल्या तोक में रहने वाले लोगाें को सड़क तक पहुंचने के लिए करीब एक से दो किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। गांव के लिए जो सड़क बनाई गई है वह अत्यधिक उबड़-खाबड़ और तंग है। जिस कारण गांव के लोग जान जोखिम में डालकर मार्ग पर सफर कर रहे है। स्थानीय लोग बताते है कि उनके गांव को सड़क से जोड़ा गया लेकिन सड़क जैसी सुविधा नहीं मिल पाई है। मार्ग इतना खतरनाक है कि कई लोग पैदल जाना ही पसंद करते है। संवाद
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