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दो कमरों में चल रहीं आठ कक्षाएं
दुगड्डा
Updated Sat, 21 Nov 2015 06:53 PM IST
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एक ओर शिक्षा विभाग सरकारी विद्यालयों में प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं देने और गुणवत्तापरक शिक्षा देने के दावे कर रहा है तो दूसरी ओर, हकीकत ठीक इसके उलट है। विभाग के दावों की पोल खोल रहा है दुगड्डा ब्लाक के ग्रामपंचायत दर्था का जूनियर हाईस्कूल। यहां दोनों विद्यालयों के मात्र दो कमरों में आठ कक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में बच्चे किस गुरुजी की बात सुनें, वे पूरी तरह से कन्फ्यूज हैं। इस विद्यालय में बच्चों को किस प्रकार गुणवत्तापरक शिक्षा मिल रही है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
फतेहपुर-लैंसडौन मार्ग पर टोलबार के निकट ग्राम पंचायत दर्था में प्राथमिक विद्यालय और जूनियर हाईस्कूल की स्थापना की गई है। दो वर्ष पूर्व बरसात में जूनियर हाईस्कूल का भवन क्षतिग्रस्त होने से उक्त विद्यालय के छात्र-छात्राओं को प्राथमिक विद्यालय के दो कमरों में से एक में शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन, विभाग ने आज तक जूनियर हाईस्कूल के भवन की न तो मरम्मत की और न ही नया भवन बनाया। नतीजतन प्राइमरी के एक कक्ष में पांच और जूनियर के एक कक्ष में तीन कक्षाएं सचालित हो रही हैं। दोनों विद्यालयों के प्रधानाध्यापक लगातार विभाग को विद्यालयों की स्थिति की जानकरी दे रहे हैं, लेकिन अधिकारियों को शायद बच्चों की शिक्षा से कुछ लेना देना नहीं है।
बच्चों की परेशानी
प्राथमिक विद्यालय के एक कमरे में कक्षा एक से पांच तक और जूनियर हाईस्कूल के उधरी के एक कमरे में कक्षा छह, सात और आठ की कक्षाएं चल रही हैं। एक कक्ष में एक से अधिक शिक्षक एक ही समय में अपनी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाते हैं तब बच्चों ध्यान भंग हो जाता है। उनकी समझ में कुछ भी नहीं आता। शिक्षक तो कोर्स पूरा कर रहे हैं, लेकिन बच्चों के पल्ले कुछ नहीं पड़ रहा है। दोनों विद्यालयों में छात्र-छात्राओं का पठन पाठन मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है
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यह बात सही है कि प्राथमिक विद्यालय के एक कमरे में जूनियर हाईस्कूल दर्था चल रहा है। क्षतिग्रस्त भवन के लिए आपदा मद और जिला योजना से प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन स्वीकृत नहीं हुआ। सर्व शिक्षा अभियान से भी विद्यालयों की मरम्मत के लिए पैसा आना बंद हो गया है। ऐेसे में बजट के अभाव में जूनियर हाईस्कूल की मरम्मत नहीं हो पा रही है। विधायक निधि के माध्यम से ही भवन की मरम्मत हो सकती है।
- एचएस नेगी, बीईओ दुगड्डा
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फतेहपुर-लैंसडौन मार्ग पर टोलबार के निकट ग्राम पंचायत दर्था में प्राथमिक विद्यालय और जूनियर हाईस्कूल की स्थापना की गई है। दो वर्ष पूर्व बरसात में जूनियर हाईस्कूल का भवन क्षतिग्रस्त होने से उक्त विद्यालय के छात्र-छात्राओं को प्राथमिक विद्यालय के दो कमरों में से एक में शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन, विभाग ने आज तक जूनियर हाईस्कूल के भवन की न तो मरम्मत की और न ही नया भवन बनाया। नतीजतन प्राइमरी के एक कक्ष में पांच और जूनियर के एक कक्ष में तीन कक्षाएं सचालित हो रही हैं। दोनों विद्यालयों के प्रधानाध्यापक लगातार विभाग को विद्यालयों की स्थिति की जानकरी दे रहे हैं, लेकिन अधिकारियों को शायद बच्चों की शिक्षा से कुछ लेना देना नहीं है।
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बच्चों की परेशानी
प्राथमिक विद्यालय के एक कमरे में कक्षा एक से पांच तक और जूनियर हाईस्कूल के उधरी के एक कमरे में कक्षा छह, सात और आठ की कक्षाएं चल रही हैं। एक कक्ष में एक से अधिक शिक्षक एक ही समय में अपनी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाते हैं तब बच्चों ध्यान भंग हो जाता है। उनकी समझ में कुछ भी नहीं आता। शिक्षक तो कोर्स पूरा कर रहे हैं, लेकिन बच्चों के पल्ले कुछ नहीं पड़ रहा है। दोनों विद्यालयों में छात्र-छात्राओं का पठन पाठन मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है
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यह बात सही है कि प्राथमिक विद्यालय के एक कमरे में जूनियर हाईस्कूल दर्था चल रहा है। क्षतिग्रस्त भवन के लिए आपदा मद और जिला योजना से प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन स्वीकृत नहीं हुआ। सर्व शिक्षा अभियान से भी विद्यालयों की मरम्मत के लिए पैसा आना बंद हो गया है। ऐेसे में बजट के अभाव में जूनियर हाईस्कूल की मरम्मत नहीं हो पा रही है। विधायक निधि के माध्यम से ही भवन की मरम्मत हो सकती है।
- एचएस नेगी, बीईओ दुगड्डा