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दुखद: गदेरे में नहाने गए दो मासूम बच्चों की डूबकर मौत
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बिल्वकेदार गदेरे में नहाने गए दो बच्चों की पानी में डूबकर मौत हो गई। दोनों बच्चे घर से खेलने का बहाना कर निकले थे, लेकिन वह खेलने के बजाय नहाने चले गए। जब रात तक वह घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने देर रात दोनों के शव बिल्वकेदार गदेरे से बरामद कर लिए। इस घटना से क्षेत्र में शोक की लहर छाई हुई है।
कोतवाली क्षेत्रांतर्गत बिल्वकेदार-खंदूखाल मार्ग पर स्थित नकोट में रह रहे चरण सिंह कीर्तिनगर क्षेत्र के सरकारी विद्यालय में लिपिक हैं। जबकि मैखंडी गांव निवासी महेश जापान मेें नौकरी करता है। चरण सिंह का बेटा सक्षम (12) और महेश सिंह का बेटा मयंक (10) दोनों दोस्त हैं और बुधवार शाम लगभग छह बजे खेलने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन वह रात तक घर नहीं लौटे। इस पर बच्चों की खोज की गई, लेकिन कुछ पता नहीं चला।
इसके बाद चरण और महेश के परिजनों ने रात लगभग साढ़े 11 बजे कोतवाली में आकर सूचना दी कि उनके बच्चे घर नहीं लौटे हैं। इस पर प्रभारी कोतवाल संतोष पैथवाल और बाजार चौकी प्रभारी रणबीर सिंह रमोला पुलिस टीम के साथ बिल्वकेदार क्षेत्र में गुमशुदा बच्चों की तलाश करने पहुंचे। तलाशी के दौरान रात लगभग साढ़े 12 बजे दोनों बच्चों के कपड़े बिल्वकेदार गदेरे मेें बने तालाब किनारे मिले। यह देख पुलिस को आशंका हो गई कि बच्चे नहाते वक्त पानी में डूब गए होंगे। पानी में बच्चों की तलाशी के लिए जल पुलिस की मदद ली गई। जल पुलिस के गोताखोर महेंद्र सिंह की मदद से पुलिस ने गदेरे से दोनों बच्चों को निकाला लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। पैथवाल ने बताया कि दोनों बच्चों के शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए हैं।
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बिल्वकेदार की घटना ने छीनी दो परिवारों की खुशियां
बिल्वकेदार गदेेरे में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने हंसते-खेलते दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। जहां कल तक बच्चों की हंसी सुनाई देती है, वहां आज परिजनों की रोने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही है।
टिहरी जिले के मठूड़ गांव निवासी चरण सिंह और मैखंडी गांव निवासी महेश सिंह ने बच्चों को पढ़ाने के लिए श्रीनगर के समीप नकोट में किराये के भवन ले रखे हैं। इन बच्चों के साथ उनकी मां भी रहती हैं। उनके बच्चे पास के निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। चरण सिंह कीर्तिनगर क्षेत्र के सरकारी विद्यालय में लिपिक हैं, जबकि महेश जापान मेें नौकरी करता है। चरण सिंह का एक बेटा व एक बेटी हैं और महेश के दो बेटे। चरण का बेटा सक्षम और महेश का बेटा मयंक दोस्त थे। सक्षम कक्षा सात और मयंक कक्षा 4 में पढ़ते थे। वह दोनों सुबह स्कूल पढ़ने गए और दोपहर को घर लौट आए, लेकिन बुधवार शाम दोनों घर से निकले और फिर कभी घर नहीं लौटे। संवाद
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कोतवाली क्षेत्रांतर्गत बिल्वकेदार-खंदूखाल मार्ग पर स्थित नकोट में रह रहे चरण सिंह कीर्तिनगर क्षेत्र के सरकारी विद्यालय में लिपिक हैं। जबकि मैखंडी गांव निवासी महेश जापान मेें नौकरी करता है। चरण सिंह का बेटा सक्षम (12) और महेश सिंह का बेटा मयंक (10) दोनों दोस्त हैं और बुधवार शाम लगभग छह बजे खेलने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन वह रात तक घर नहीं लौटे। इस पर बच्चों की खोज की गई, लेकिन कुछ पता नहीं चला।
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इसके बाद चरण और महेश के परिजनों ने रात लगभग साढ़े 11 बजे कोतवाली में आकर सूचना दी कि उनके बच्चे घर नहीं लौटे हैं। इस पर प्रभारी कोतवाल संतोष पैथवाल और बाजार चौकी प्रभारी रणबीर सिंह रमोला पुलिस टीम के साथ बिल्वकेदार क्षेत्र में गुमशुदा बच्चों की तलाश करने पहुंचे। तलाशी के दौरान रात लगभग साढ़े 12 बजे दोनों बच्चों के कपड़े बिल्वकेदार गदेरे मेें बने तालाब किनारे मिले। यह देख पुलिस को आशंका हो गई कि बच्चे नहाते वक्त पानी में डूब गए होंगे। पानी में बच्चों की तलाशी के लिए जल पुलिस की मदद ली गई। जल पुलिस के गोताखोर महेंद्र सिंह की मदद से पुलिस ने गदेरे से दोनों बच्चों को निकाला लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। पैथवाल ने बताया कि दोनों बच्चों के शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए हैं।
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बिल्वकेदार की घटना ने छीनी दो परिवारों की खुशियां
बिल्वकेदार गदेेरे में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने हंसते-खेलते दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। जहां कल तक बच्चों की हंसी सुनाई देती है, वहां आज परिजनों की रोने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही है।
टिहरी जिले के मठूड़ गांव निवासी चरण सिंह और मैखंडी गांव निवासी महेश सिंह ने बच्चों को पढ़ाने के लिए श्रीनगर के समीप नकोट में किराये के भवन ले रखे हैं। इन बच्चों के साथ उनकी मां भी रहती हैं। उनके बच्चे पास के निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। चरण सिंह कीर्तिनगर क्षेत्र के सरकारी विद्यालय में लिपिक हैं, जबकि महेश जापान मेें नौकरी करता है। चरण सिंह का एक बेटा व एक बेटी हैं और महेश के दो बेटे। चरण का बेटा सक्षम और महेश का बेटा मयंक दोस्त थे। सक्षम कक्षा सात और मयंक कक्षा 4 में पढ़ते थे। वह दोनों सुबह स्कूल पढ़ने गए और दोपहर को घर लौट आए, लेकिन बुधवार शाम दोनों घर से निकले और फिर कभी घर नहीं लौटे। संवाद