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गढ़वाल विश्वविद्यालय में सीटों में नहीं होगा कोई बदलाव
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काफी हंगामे के बाद एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में सीट पूर्व की भांति रखने की छात्रों की मांग मान ली है। विश्वविद्यालय के पूर्व में लिए गए निर्णय को रोलबैक करने से यहां विभिन्न पाठ्यक्रम में शिक्षण सत्र 2021-22 के समान सीटों में दाखिला होगा।
एनईपी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) और पूर्व के तीन वर्षों में हुए दाखिलों को देखते हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय ने विभिन्न विषयों में सीटों में कटौती की थी। इससे विभिन्न छात्र संगठन आक्रोशित थे। विरोध स्वरूप रोज यहां प्रदर्शन हो रहे थे।
छात्रों की मांग पर शनिवार को एनईपी समन्वयक और संकाय अध्यक्षों की बैठक हुई। बैठक के बाद छात्र संगठनों के सामने सीटों का ब्योरा रखा गया। एनईपी समन्वयक प्रो. एके डोबरियाल ने बताया कि स्नातकोत्तर स्तर पर पूर्व की भांति सीटों की संख्या कर दी गई है। वहीं स्नातक में सीट पूर्व की तरह ही है। एनईपी के तहत कोर (मुख्य) और एडीशनल (अतिरिक्त) विषयों की वजह से सीट कम दिखाई दे रही है। दोनों वर्गों में सीट अलग-अलग निर्धारित की गई है।
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छात्रों ने इसे धोखा बताते हुए हंगामा कर दिया। उनका कहना था कि यदि कोर विषय में पसंदीदा विषय नहीं मिलने पर छात्र इसे अतिरिक्त विषय के रूप में चुनता है, तो उसे दो साल बाद इसे छोड़ना पड़ेगा। इससे मजबूरन उसे ऐसे विषय में डिग्री हासिल करनी पड़ेगी, जिस विषय को वह नहीं चाहता। छात्र नेता ऋतांशु कंडारी, अनमोल, राम प्रकाश, सम्राट, सुधांशु, गौरव और कैवल्य आदि ने कहा कि एनईपी के तहत किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में सीट कम नहीं की गई। सिर्फ गढ़वाल विश्वविद्यालय में ऐसा हो रहा है। इस दौरान मुख्य नियंता प्रो. बीपी नैथानी समेत शिक्षकों ने छात्रों को काफी समझाने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं माने।
अंत में विश्वविद्यालय छात्रों के आगे झुक गया। विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. महावीर नेगी और डीन इंजीनियरिंग प्रो. वाईपी रैवानी ने बताया कि सीट पूर्व की भांति की जा रही है लेकिन अतिरिक्त विषय मेें कोई सीट वृद्धि नहीं की जाएगी।
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एनईपी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) और पूर्व के तीन वर्षों में हुए दाखिलों को देखते हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय ने विभिन्न विषयों में सीटों में कटौती की थी। इससे विभिन्न छात्र संगठन आक्रोशित थे। विरोध स्वरूप रोज यहां प्रदर्शन हो रहे थे।
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छात्रों की मांग पर शनिवार को एनईपी समन्वयक और संकाय अध्यक्षों की बैठक हुई। बैठक के बाद छात्र संगठनों के सामने सीटों का ब्योरा रखा गया। एनईपी समन्वयक प्रो. एके डोबरियाल ने बताया कि स्नातकोत्तर स्तर पर पूर्व की भांति सीटों की संख्या कर दी गई है। वहीं स्नातक में सीट पूर्व की तरह ही है। एनईपी के तहत कोर (मुख्य) और एडीशनल (अतिरिक्त) विषयों की वजह से सीट कम दिखाई दे रही है। दोनों वर्गों में सीट अलग-अलग निर्धारित की गई है।
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छात्रों ने इसे धोखा बताते हुए हंगामा कर दिया। उनका कहना था कि यदि कोर विषय में पसंदीदा विषय नहीं मिलने पर छात्र इसे अतिरिक्त विषय के रूप में चुनता है, तो उसे दो साल बाद इसे छोड़ना पड़ेगा। इससे मजबूरन उसे ऐसे विषय में डिग्री हासिल करनी पड़ेगी, जिस विषय को वह नहीं चाहता। छात्र नेता ऋतांशु कंडारी, अनमोल, राम प्रकाश, सम्राट, सुधांशु, गौरव और कैवल्य आदि ने कहा कि एनईपी के तहत किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में सीट कम नहीं की गई। सिर्फ गढ़वाल विश्वविद्यालय में ऐसा हो रहा है। इस दौरान मुख्य नियंता प्रो. बीपी नैथानी समेत शिक्षकों ने छात्रों को काफी समझाने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं माने।
अंत में विश्वविद्यालय छात्रों के आगे झुक गया। विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. महावीर नेगी और डीन इंजीनियरिंग प्रो. वाईपी रैवानी ने बताया कि सीट पूर्व की भांति की जा रही है लेकिन अतिरिक्त विषय मेें कोई सीट वृद्धि नहीं की जाएगी।