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Pauri News: तीन दिन से अलकनंदा की ओर टकटकी लगाए हैं परिजन
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श्रीनगर। बीते तीन दिनों से अलकनंदा नदी में बनी जल विद्युत परियोजना की झील में लापता युवकों का रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। लेकिन उनका कोई पता न चलने से परिजन निराश व हताश हैं।
हादसे में लापता मनोज (29) के पिता धर्मानंद ढौंडियाल अलकनंदा की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि कब डंपर झील से बाहर निकलेगा व कब उन्हें अपने बेटे का चेहरा देखने को मिलेगा। वह बताते हैं कि जिस कंपनी में मनोज काम करता था उसके मालिक ने मंगलवार सुबह फोन कर उन्हें दुर्घटना की सूचना दी। जिसके बाद वह अन्य रिश्तेदारों के साथ यहां पहुंचे।
कहा कि तीन दिनों से सभी इंतजार में बैठे हैं कि कब उसका चेहरा दिखेगा। मनोज को याद करते हुए पिता बताते हैं कि बेटे का रोजाना एक बार फोन आ जाता था, अब तो फोन की घंटी सुनकर भी चिड़चिड़ाहट हो रही है। गांव से लगातार फोन आ रहे हैं लेकिन उनके पास बताने के लिए कुछ नहीं है। वहीं सूचना मिलने पर देहरादून से पहुंचे मनोज के ममेरे भाई महिषानंद ने बताया कि हादसे से दो दिन पहले वीडियो कॉल पर बात हुई थी, जिसमें मनोज ने कुछ दिनों में देहरादून आने की बात कही थी।
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उधर, कुंदन सिंह (28) के पिता लक्ष्मण सिंह ने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही वह यहां पहुंच गए, लेकिन उन्हें इंतजार के अलावा कुछ नहीं मिला। पहले दिन दोपहर तक गोताखोर घटनास्थल पर पहुंचे, दूसरे दिन हाइड्रा के माध्यम से झील से डंपर को निकालने की कोशिश की गई। तीसरे दिन नजीबाबाद से क्रेन बुलाई गई, लेकिन यहां पहुंचते ही उसमें तकनीकी खराबी आ गई, जिसे ठीक करने में दो घंटे का समय लगा। परिजन मनोहर सिंह कंडारी ने कहा कि जिस स्थान पर हादसा हुआ वह दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र है बावजूद यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। अगर कोई बड़ा हादसा होता है तो कैसे स्थिति से निपटा जाएगा।
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हादसे में लापता मनोज (29) के पिता धर्मानंद ढौंडियाल अलकनंदा की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि कब डंपर झील से बाहर निकलेगा व कब उन्हें अपने बेटे का चेहरा देखने को मिलेगा। वह बताते हैं कि जिस कंपनी में मनोज काम करता था उसके मालिक ने मंगलवार सुबह फोन कर उन्हें दुर्घटना की सूचना दी। जिसके बाद वह अन्य रिश्तेदारों के साथ यहां पहुंचे।
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कहा कि तीन दिनों से सभी इंतजार में बैठे हैं कि कब उसका चेहरा दिखेगा। मनोज को याद करते हुए पिता बताते हैं कि बेटे का रोजाना एक बार फोन आ जाता था, अब तो फोन की घंटी सुनकर भी चिड़चिड़ाहट हो रही है। गांव से लगातार फोन आ रहे हैं लेकिन उनके पास बताने के लिए कुछ नहीं है। वहीं सूचना मिलने पर देहरादून से पहुंचे मनोज के ममेरे भाई महिषानंद ने बताया कि हादसे से दो दिन पहले वीडियो कॉल पर बात हुई थी, जिसमें मनोज ने कुछ दिनों में देहरादून आने की बात कही थी।
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उधर, कुंदन सिंह (28) के पिता लक्ष्मण सिंह ने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही वह यहां पहुंच गए, लेकिन उन्हें इंतजार के अलावा कुछ नहीं मिला। पहले दिन दोपहर तक गोताखोर घटनास्थल पर पहुंचे, दूसरे दिन हाइड्रा के माध्यम से झील से डंपर को निकालने की कोशिश की गई। तीसरे दिन नजीबाबाद से क्रेन बुलाई गई, लेकिन यहां पहुंचते ही उसमें तकनीकी खराबी आ गई, जिसे ठीक करने में दो घंटे का समय लगा। परिजन मनोहर सिंह कंडारी ने कहा कि जिस स्थान पर हादसा हुआ वह दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र है बावजूद यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। अगर कोई बड़ा हादसा होता है तो कैसे स्थिति से निपटा जाएगा।