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आदेश का पालन नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज
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सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना केस में सुनवाई करते हुए गढ़वाल विवि के फार्मेसी विभाग के शिक्षकों से संबंधित आदेश का पालन न किए जाने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने विवि के कुलपति और कुलसचिव को पूर्व में पारित आदेश के अनुपालन के लिए एक और मौका दिया है। मामले में अब 17 मई को सुनवाई होगी।
बता दें कि गढ़वाल विवि के फार्मेसी विभाग में उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत आयोजित चयन प्रक्रिया के माध्यम से वर्ष 2004 और 2007 में 8 शिक्षकों (एक एसोसिएट प्रोफेसर व 7 सहायक प्रो.) की नियुक्ति की गई थी, लेकिन विवि ने उनको स्थायी नियुक्ति देने के बजाय अस्थायी नियुक्ति दी। जिस पर संबंधित शिक्षकों ने वर्ष 2011 में नैनीताल हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट विवि के पक्ष में फैसला सुनाया। फैसले के खिलाफ शिक्षक सुप्रीम कोर्ट में चले गए। गत वर्ष 3 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के हक में फैसला सुनाते हुए उन्हें समस्त सेवा लाभ देने के आदेश दिए। संबंधित शिक्षकों ने फरवरी 2022 में कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि विवि ने आदेश का पूर्ण पालन नहीं किया है। फैसले का पालन न करने पर कोर्ट ने 11 फरवरी को अवमानना का नोटिस जारी कर कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल और कुलसचिव डॉ. अजय खंडूड़ी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए।
11 अप्रैल को अवमानना मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश का पालन न होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि यदि न्यायालय कोई आदेश पारित करता है, तो उसका निश्चित समय में पालन करने के लिए विवि जिम्मेदार है। अगर विवि ऐसा नहीं करता है, तो यह माना जाएगा कि जानबूझकर अवहेलना की गई है। मामले में आगे किसी भी कार्रवाई करने से पूर्व न्यायालय कुलपति और कुलसचिव को पूर्व में पारित आदेश का अनुपालन करने के लिए एक अवसर देता है। मामले को 17 मई को सुना जाएगा।
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बता दें कि गढ़वाल विवि के फार्मेसी विभाग में उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत आयोजित चयन प्रक्रिया के माध्यम से वर्ष 2004 और 2007 में 8 शिक्षकों (एक एसोसिएट प्रोफेसर व 7 सहायक प्रो.) की नियुक्ति की गई थी, लेकिन विवि ने उनको स्थायी नियुक्ति देने के बजाय अस्थायी नियुक्ति दी। जिस पर संबंधित शिक्षकों ने वर्ष 2011 में नैनीताल हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट विवि के पक्ष में फैसला सुनाया। फैसले के खिलाफ शिक्षक सुप्रीम कोर्ट में चले गए। गत वर्ष 3 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के हक में फैसला सुनाते हुए उन्हें समस्त सेवा लाभ देने के आदेश दिए। संबंधित शिक्षकों ने फरवरी 2022 में कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि विवि ने आदेश का पूर्ण पालन नहीं किया है। फैसले का पालन न करने पर कोर्ट ने 11 फरवरी को अवमानना का नोटिस जारी कर कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल और कुलसचिव डॉ. अजय खंडूड़ी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए।
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11 अप्रैल को अवमानना मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश का पालन न होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि यदि न्यायालय कोई आदेश पारित करता है, तो उसका निश्चित समय में पालन करने के लिए विवि जिम्मेदार है। अगर विवि ऐसा नहीं करता है, तो यह माना जाएगा कि जानबूझकर अवहेलना की गई है। मामले में आगे किसी भी कार्रवाई करने से पूर्व न्यायालय कुलपति और कुलसचिव को पूर्व में पारित आदेश का अनुपालन करने के लिए एक अवसर देता है। मामले को 17 मई को सुना जाएगा।
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