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खंडहर बनते पुस्तैनी घरों की सुध लेंगे प्रवासी
कोटद्वार
Updated Fri, 20 Nov 2015 05:54 PM IST
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पलायन के चलते खाली होते गांवों में खंडहर बनते पुश्तैनी घरों और बंजर खेतों को आबाद करने तथा अपनी लोक संस्कृति और रीति-रिवाजों को नई पीढ़ी तक पहुंचाकर जीवित रखने के लिए ग्राम पंचायत अंगणी के लोगों और प्रवासियों ने पहल की है। रिखणीखाल विकासखंड के अंतर्गत ग्रामसभा अंगणी में जून 2016 में तीन-दिवसीय ‘अंगणी ग्रामोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है।
सोशल मीडिया फेसबुक और व्हाट्स एप से शुरू हुई इस मुहिम ने प्रवासियों को अपने गांव के बारे में सोचने को मजबूर किया। इसका नतीजा यह रहा कि गांव में अब प्रति वर्ष ‘अंगणी ग्रामोत्सव’ मनाया जाएगा जिसमें देश-विदेश में रहने वाले सभी प्रवासी अपने घर को लौटेंगे। अपने खंडहर बनने जा रहे घरों की मरम्मत करेंगे। नई पीढ़ी अपने पुरखों का गांव देखेगी और यहां के लोग अपनी संस्कृति और रीति रिवाजों से वाकिफ होगी।
ज्ञात हो कि लैंसडौन तहसील क्षेत्र के अंतर्गत प्रसिद्ध ताड़केश्वर धाम के निकट स्थित ग्रामसभा अंगणी क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से रिखणीखाल क्षेत्र के बड़े गांवों में से एक है। बदलते सामाजिक परिवेश और पलायन की मार के चलते अंगणी के दो-तिहाई से अधिक परिवार गांव छोड़ शहरों में बस गये हैं। उत्तराखंड के अन्य गांवों की तरह ही अंगणी में भी नाममात्र की आबादी रह गई है, जिनमें अधिकांश वृद्ध और महिलायें ही हैं। प्रचुर उर्वर कृषि भूमि व जल संपदा की उपलब्धता के बावजूद बंदर और सूअरों के बढ़ते प्रकोप से गांव में रह रहे लोग भी खेती का मोह छोड़ चुके हैं। राजस्व अभिलेखों में दर्ज 147.70 हेक्टेअर कृषि योग्य भूमि वाले अंगणी गांव में वर्तमान में महज 10-15 प्रतिशत खेत ही आबाद रह गये हैं।
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गत दिवस ग्रामप्रधान श्री सुरजीत सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रति वर्ष जून माह में ‘अंगणी ग्रामोत्सव’ के आयोजन का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर आयोजन समिति के लिये मुकुंद सिंह चौहान को अध्यक्ष, दामोदर सिंह चौहान, अनिता चौहान को उपाध्यक्ष, कैलाश सिंह चौहान को सचिव, वीरेंद्र सिंह चौहान, यशोदा देवी को कोषाध्यक्ष चुना गया। अंगणी ग्रामोत्सव समिति के प्रवक्ता जीतेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ग्रामोत्सव में विकास गोष्ठी, गढ़वाली सांस्कृतिक कार्यक्रम और जरूरतमंदों और मेधावी बच्चों को आर्थिक सहायता दी जाएगी और गांव के बुजुर्गों को सम्मानित किया जाएगा।
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सोशल मीडिया फेसबुक और व्हाट्स एप से शुरू हुई इस मुहिम ने प्रवासियों को अपने गांव के बारे में सोचने को मजबूर किया। इसका नतीजा यह रहा कि गांव में अब प्रति वर्ष ‘अंगणी ग्रामोत्सव’ मनाया जाएगा जिसमें देश-विदेश में रहने वाले सभी प्रवासी अपने घर को लौटेंगे। अपने खंडहर बनने जा रहे घरों की मरम्मत करेंगे। नई पीढ़ी अपने पुरखों का गांव देखेगी और यहां के लोग अपनी संस्कृति और रीति रिवाजों से वाकिफ होगी।
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ज्ञात हो कि लैंसडौन तहसील क्षेत्र के अंतर्गत प्रसिद्ध ताड़केश्वर धाम के निकट स्थित ग्रामसभा अंगणी क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से रिखणीखाल क्षेत्र के बड़े गांवों में से एक है। बदलते सामाजिक परिवेश और पलायन की मार के चलते अंगणी के दो-तिहाई से अधिक परिवार गांव छोड़ शहरों में बस गये हैं। उत्तराखंड के अन्य गांवों की तरह ही अंगणी में भी नाममात्र की आबादी रह गई है, जिनमें अधिकांश वृद्ध और महिलायें ही हैं। प्रचुर उर्वर कृषि भूमि व जल संपदा की उपलब्धता के बावजूद बंदर और सूअरों के बढ़ते प्रकोप से गांव में रह रहे लोग भी खेती का मोह छोड़ चुके हैं। राजस्व अभिलेखों में दर्ज 147.70 हेक्टेअर कृषि योग्य भूमि वाले अंगणी गांव में वर्तमान में महज 10-15 प्रतिशत खेत ही आबाद रह गये हैं।
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गत दिवस ग्रामप्रधान श्री सुरजीत सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रति वर्ष जून माह में ‘अंगणी ग्रामोत्सव’ के आयोजन का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर आयोजन समिति के लिये मुकुंद सिंह चौहान को अध्यक्ष, दामोदर सिंह चौहान, अनिता चौहान को उपाध्यक्ष, कैलाश सिंह चौहान को सचिव, वीरेंद्र सिंह चौहान, यशोदा देवी को कोषाध्यक्ष चुना गया। अंगणी ग्रामोत्सव समिति के प्रवक्ता जीतेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ग्रामोत्सव में विकास गोष्ठी, गढ़वाली सांस्कृतिक कार्यक्रम और जरूरतमंदों और मेधावी बच्चों को आर्थिक सहायता दी जाएगी और गांव के बुजुर्गों को सम्मानित किया जाएगा।