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Pauri News: बरसात में कान में फंगल संक्रमण के मरीज बढ़े
Sat, 11 Jul 2026 04:31 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sat, 11 Jul 2026 04:31 PM IST
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उपजिला चिकित्सालय में एक सप्ताह में पहुंचे पांच मरीज
श्रीनगर। मानसून शुरू होने के साथ ही श्रीनगर उपजिला चिकित्सालय में कान में फंगल संक्रमण (ओटोमाइकोसिस) के मरीज पहुंचने लगे हैं। पिछले एक सप्ताह में 5 मरीज इससे पीड़ित पहुंचे हैं। इनमें श्रीनगर के अलावा रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और पौड़ी जनपदों से भी मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. दिगपाल दत्त ने बताया कि बरसात में वातावरण में नमी बढ़ने से कान में फंगस पनपने की आशंका काफी बढ़ जाती है। यदि कान में पानी चला जाए और वह लंबे समय तक नमी में रहे तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है। शुरुआत में मरीजों को कान में खुजली, दर्द, भारीपन, सुनाई कम देना और कान से स्राव जैसी शिकायतें होती हैं। उन्होंने बताया कि समय रहते उपचार नहीं कराने पर संक्रमण कान के पर्दे तक पहुंच सकता है जिससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। डॉ. दत्त ने लोगों से बरसात के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि बारिश में भीगने या नहाने के बाद कानों को अच्छी तरह सुखाएं। कान में तीली, पिन या अन्य नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें और बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी प्रकार का तेल या दवा कान में न डालें। उन्होंने कहा कि बरसात में थोड़ी-सी सावधानी और समय पर उपचार से इस संक्रमण से आसानी से बचा जा सकता है।
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श्रीनगर। मानसून शुरू होने के साथ ही श्रीनगर उपजिला चिकित्सालय में कान में फंगल संक्रमण (ओटोमाइकोसिस) के मरीज पहुंचने लगे हैं। पिछले एक सप्ताह में 5 मरीज इससे पीड़ित पहुंचे हैं। इनमें श्रीनगर के अलावा रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और पौड़ी जनपदों से भी मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. दिगपाल दत्त ने बताया कि बरसात में वातावरण में नमी बढ़ने से कान में फंगस पनपने की आशंका काफी बढ़ जाती है। यदि कान में पानी चला जाए और वह लंबे समय तक नमी में रहे तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है। शुरुआत में मरीजों को कान में खुजली, दर्द, भारीपन, सुनाई कम देना और कान से स्राव जैसी शिकायतें होती हैं। उन्होंने बताया कि समय रहते उपचार नहीं कराने पर संक्रमण कान के पर्दे तक पहुंच सकता है जिससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। डॉ. दत्त ने लोगों से बरसात के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि बारिश में भीगने या नहाने के बाद कानों को अच्छी तरह सुखाएं। कान में तीली, पिन या अन्य नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें और बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी प्रकार का तेल या दवा कान में न डालें। उन्होंने कहा कि बरसात में थोड़ी-सी सावधानी और समय पर उपचार से इस संक्रमण से आसानी से बचा जा सकता है।