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Pauri News: अभद्रता व सरकारी कामकाज में बाधा के तीन दोषियों का परिवीक्षा पर छोड़ा
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी की अदालत ने जिला आबकारी अधिकारी के साथ अभद्रता व सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने के तीनों दोषियों को परिवीक्षा पर छोड़ दिया है। अदालत ने बीते 18 नवंबर को पालिकाध्यक्ष पौड़ी यशपाल बेनाम सहित तीन लोगों को आबकारी अधिकारी के साथ अद्रता व सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने का दोषी पाया था। वर्ष 2017 में शराब विरोधी आंदोलन के दौरान पालिकाध्यक्ष बेनाम व तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी के बीच डीएम कार्यालय में विवाद हो गया था। इसके बाद आबकारी अधिकारी ने कोतवाली पौड़ी में मुकदमा दर्ज करवाया था। मामले में पालिकाध्यक्ष बेनाम सहित तीनों आरोपी पहले ही 28 दिनों तक जेल में रह चुके हैं।
बीते 18 नवंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी की अदालत ने गवाहों के बयान व पुलिस की चार्जशीट के आधार पर न्यायालय ने तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी प्रभाशंकर मिश्रा के साथ गाली गलौज, जान से मारने की धमकी और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के मामले में पालिकाध्यक्ष पौड़ी यशपाल बेनाम, पूर्व प्रदेश सचिव कांग्रेस सरिता नेगी और वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक बिष्ट को दोषी पाया था। अदालत ने सजा के फैसले को सुरक्षित रखते हुए सुनवाई की तिथि 28 नवंबर तय की थी। अभियोजन अधिकारी यशदीप श्रीवास्तव और नामित अधिवक्ता अभियोजन आशीष जदली ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी रवि प्रकाश शुक्ला की अदालत ने प्रत्येक को तीस-तीस हजार रुपये के दो-दो जमानती व तीस हजार के व्यक्तिगत बंध पत्र के साथ परिविक्षा पर छोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि अदालत के आदेश के तहत तीनों दोषी एक साल तक शांति कायम रखने के साथ-साथ सदाचारी बने रहेंगे।
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बीते 18 नवंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी की अदालत ने गवाहों के बयान व पुलिस की चार्जशीट के आधार पर न्यायालय ने तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी प्रभाशंकर मिश्रा के साथ गाली गलौज, जान से मारने की धमकी और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के मामले में पालिकाध्यक्ष पौड़ी यशपाल बेनाम, पूर्व प्रदेश सचिव कांग्रेस सरिता नेगी और वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक बिष्ट को दोषी पाया था। अदालत ने सजा के फैसले को सुरक्षित रखते हुए सुनवाई की तिथि 28 नवंबर तय की थी। अभियोजन अधिकारी यशदीप श्रीवास्तव और नामित अधिवक्ता अभियोजन आशीष जदली ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी रवि प्रकाश शुक्ला की अदालत ने प्रत्येक को तीस-तीस हजार रुपये के दो-दो जमानती व तीस हजार के व्यक्तिगत बंध पत्र के साथ परिविक्षा पर छोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि अदालत के आदेश के तहत तीनों दोषी एक साल तक शांति कायम रखने के साथ-साथ सदाचारी बने रहेंगे।
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