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वनवास से लौटे राम, लक्ष्मण और सीता का नगर वासियों ने किया भव्य स्वागत
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श्रीनगर राम लीला मे भगवान राम के अयोध्या पहुचने पर शहर मे निकली राधा कृष्ण की भब्य शोभायात्रा
- फोटो : SHRINAGAR
पिता की आज्ञा पर 14 वर्ष का वनवास पूरा कर भगवान श्रीराम पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे आए। उनके आने की खबर सुनकर नगरवासी हर्षित हो गए। उन्होंने भगवान का भव्य स्वागत किया। इसके बाद नगर में विभिन्न बैंड दस्तों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें जमकर आतिशबाजी की गई।
लंकापति रावण और असुरों का नाश करके अयोध्या लौटने पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान आदि की शोभा यात्रा देखने लायक थी। इस मौके पर भरत शत्रुघन, शिव, पार्वती, राधा, कृष्ण, दुर्गा, विभीषण, सुग्रीव आदि की झांकी भी नगर में आकर्षण का केंद्र रही। शाम सात बजे से गणेश बाजार से शुरू हुई शोभा यात्रा रात करीब 11 बजे तक चली। इस दौरान विभिन्न मार्गों से गुजरने पर शोभायात्रा को देखने लोगों की भारी भीड़ लगी रही। रामलीला की 125वीं वर्षगांठ पर रामलीला समिति ने खुशी व्यक्त कर दर्शकों और आयोजन में सहयोग करने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान रामलीला समिति के अध्यक्ष हिमांशु अग्रवाल, सभासद अनूप बहुगुणा, सागर अग्रवाल, दीपक उनियाल, शंकर मणि मिश्रा, संजय गुप्ता आदि लोग मौजूद रहे।
वन से राम की खडाऊं लेकर अयोध्या लौटे भरत
पुत्र वियोग में महाराज दशरथ ने त्यागे प्राण
अमर उजाला ब्यूरो
रुद्रप्रयाग। जिला मुख्यालय स्थित अपर बाजार में आयोजित रामलीला के पांचवें दिन राम-भरत मिलाप लीला व पुत्र वियोग में महाराज दशरथ द्वारा प्राण त्यागने की लीला का मंचन किया गया। इस मौके पर भरत द्वारा माता कैकेयी के प्रति क्रोध व्यक्त करने, जंगल पहुंचकर राम से अयोध्या लौटने की विनती व खडाऊं सिर पर रखकर राजमहल लौटने के दृश्य शानदार रहे।
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गणेश मंदिर परिसर में रामलीला की चौथी संध्या का शुभारंभ अयोध्या राजमहल से होता है। जहां पुत्र वियोग में महाराज दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। पिता की मृत्यु की सूचना पर भरत और शत्रुघ्न अयोध्या लौटते हैं, तो उन्हें पूरे घटनाक्रम का पता चलता है। भरत अपनी माता कैकेयी पर क्रोधित होते हैं। कैकेयी अपने पुत्र भरत को समझाने का प्रयास करती हैं, लेकिन वह नहीं मानते। इधर, शत्रुघ्न भी मंथरा को बुराभला कहते हुए उसका तिरस्कार करते हैं। भरत महर्षि वशिष्ठ और अन्य लोगों के साथ राम से मिलने सरयू नदी पार कर चित्रकूट पहुंचते हैं। वह, राम को पिता महाराज दशरथ की मृत्यु का समाचार देते हुए कहते है, कि अयोध्या आपके बिना अधूरी है। आप राजमहल आकर राजगद्दी ग्रहण कर लो, लेकिन श्रीराम स्वर्गवासी पिता के वचनों का पालन करने की बात कहते हैं। इस पर, भरत उनकी खडाऊं लेकर राजमहल लौटते हैं और स्वयं भी सन्यासी के तौर पर जीवन यापन करने लगते हैं। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष दीपांशु भट्ट, केशव डोभाल, श्याम लाल सुंदरियाल, आचार्य दीपक नौटियाल, विक्रांत खन्ना, चंद्रशेखर चौधरी, बदरी नौटियाल समेत अन्य लोग मौजूद थे।
हनुमान दर्शन की भव्य झांकी निकाली
गैरसैंण। रघुनंदन रामलीला कमेटी गैरसैंण की ओर से आयोजित रामलीला मंचन में आयोजकों ने पवन पुुत्र हनुमान दर्शन की भव्य झांकी निकाली। इस दौरान आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारणों के साथ राम दूत हनुमान की पूजा-अर्चनाएं संपादित कर भोग अर्पित किया। रामलीला मंचन में श्री राम और लक्ष्मण माता सीता की ढूंढ-खोज करते हुए किष्किंधा पहुंचते हैं। तो महाराजा सुग्रीव के दूत दो तपस्वी कुमारों के वहां आने की सूचना देते हैं। सुग्रीव हनुमान को उनका पता लगाने के लिए भेजते हैं। हनुमान वेश बदलकर राम और लक्ष्मण से उनका यहां आने का कारण पूछते हैं। श्री राम हनुमान को माता पिता की आज्ञा से 14 वर्ष का वनवास और सीता हरण का वृत्तांत सुनाते हैं। अपने आराध्य श्री राम को समीप देखकर हनुमान भावुक होकर उनकी आराधना करते हैं। और फिर श्री राम व लक्ष्मण को सुग्रीव के दरबार में ले जाते हैं। महाराजा सुग्रीव श्री राम को बाली की ओर से उसको प्रताड़ित करने की घटना के बारे में बताते है। श्री राम सुग्रीव से बाली के साथ युद्ध करने के लिए कहते हैं। बाली और सुग्रीव के मध्य हुए भीषण युद्ध में श्री राम बाली का वध कर देते हैं। रामलीला मंचन में कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर रामलीला कमेटी के संरक्षक पृथ्वी सिंह बिष्ट, अध्यक्ष रणजीत शाह, सुरेश लाल शाह, अनुसूया प्रसाद गौड़, जसवंत शाह, सरोज शाह, दिनेश गौड़, मनीष मठपाल सहित सेकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
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लंकापति रावण और असुरों का नाश करके अयोध्या लौटने पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान आदि की शोभा यात्रा देखने लायक थी। इस मौके पर भरत शत्रुघन, शिव, पार्वती, राधा, कृष्ण, दुर्गा, विभीषण, सुग्रीव आदि की झांकी भी नगर में आकर्षण का केंद्र रही। शाम सात बजे से गणेश बाजार से शुरू हुई शोभा यात्रा रात करीब 11 बजे तक चली। इस दौरान विभिन्न मार्गों से गुजरने पर शोभायात्रा को देखने लोगों की भारी भीड़ लगी रही। रामलीला की 125वीं वर्षगांठ पर रामलीला समिति ने खुशी व्यक्त कर दर्शकों और आयोजन में सहयोग करने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान रामलीला समिति के अध्यक्ष हिमांशु अग्रवाल, सभासद अनूप बहुगुणा, सागर अग्रवाल, दीपक उनियाल, शंकर मणि मिश्रा, संजय गुप्ता आदि लोग मौजूद रहे।
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वन से राम की खडाऊं लेकर अयोध्या लौटे भरत
पुत्र वियोग में महाराज दशरथ ने त्यागे प्राण
अमर उजाला ब्यूरो
रुद्रप्रयाग। जिला मुख्यालय स्थित अपर बाजार में आयोजित रामलीला के पांचवें दिन राम-भरत मिलाप लीला व पुत्र वियोग में महाराज दशरथ द्वारा प्राण त्यागने की लीला का मंचन किया गया। इस मौके पर भरत द्वारा माता कैकेयी के प्रति क्रोध व्यक्त करने, जंगल पहुंचकर राम से अयोध्या लौटने की विनती व खडाऊं सिर पर रखकर राजमहल लौटने के दृश्य शानदार रहे।
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गणेश मंदिर परिसर में रामलीला की चौथी संध्या का शुभारंभ अयोध्या राजमहल से होता है। जहां पुत्र वियोग में महाराज दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। पिता की मृत्यु की सूचना पर भरत और शत्रुघ्न अयोध्या लौटते हैं, तो उन्हें पूरे घटनाक्रम का पता चलता है। भरत अपनी माता कैकेयी पर क्रोधित होते हैं। कैकेयी अपने पुत्र भरत को समझाने का प्रयास करती हैं, लेकिन वह नहीं मानते। इधर, शत्रुघ्न भी मंथरा को बुराभला कहते हुए उसका तिरस्कार करते हैं। भरत महर्षि वशिष्ठ और अन्य लोगों के साथ राम से मिलने सरयू नदी पार कर चित्रकूट पहुंचते हैं। वह, राम को पिता महाराज दशरथ की मृत्यु का समाचार देते हुए कहते है, कि अयोध्या आपके बिना अधूरी है। आप राजमहल आकर राजगद्दी ग्रहण कर लो, लेकिन श्रीराम स्वर्गवासी पिता के वचनों का पालन करने की बात कहते हैं। इस पर, भरत उनकी खडाऊं लेकर राजमहल लौटते हैं और स्वयं भी सन्यासी के तौर पर जीवन यापन करने लगते हैं। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष दीपांशु भट्ट, केशव डोभाल, श्याम लाल सुंदरियाल, आचार्य दीपक नौटियाल, विक्रांत खन्ना, चंद्रशेखर चौधरी, बदरी नौटियाल समेत अन्य लोग मौजूद थे।
हनुमान दर्शन की भव्य झांकी निकाली
गैरसैंण। रघुनंदन रामलीला कमेटी गैरसैंण की ओर से आयोजित रामलीला मंचन में आयोजकों ने पवन पुुत्र हनुमान दर्शन की भव्य झांकी निकाली। इस दौरान आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारणों के साथ राम दूत हनुमान की पूजा-अर्चनाएं संपादित कर भोग अर्पित किया। रामलीला मंचन में श्री राम और लक्ष्मण माता सीता की ढूंढ-खोज करते हुए किष्किंधा पहुंचते हैं। तो महाराजा सुग्रीव के दूत दो तपस्वी कुमारों के वहां आने की सूचना देते हैं। सुग्रीव हनुमान को उनका पता लगाने के लिए भेजते हैं। हनुमान वेश बदलकर राम और लक्ष्मण से उनका यहां आने का कारण पूछते हैं। श्री राम हनुमान को माता पिता की आज्ञा से 14 वर्ष का वनवास और सीता हरण का वृत्तांत सुनाते हैं। अपने आराध्य श्री राम को समीप देखकर हनुमान भावुक होकर उनकी आराधना करते हैं। और फिर श्री राम व लक्ष्मण को सुग्रीव के दरबार में ले जाते हैं। महाराजा सुग्रीव श्री राम को बाली की ओर से उसको प्रताड़ित करने की घटना के बारे में बताते है। श्री राम सुग्रीव से बाली के साथ युद्ध करने के लिए कहते हैं। बाली और सुग्रीव के मध्य हुए भीषण युद्ध में श्री राम बाली का वध कर देते हैं। रामलीला मंचन में कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर रामलीला कमेटी के संरक्षक पृथ्वी सिंह बिष्ट, अध्यक्ष रणजीत शाह, सुरेश लाल शाह, अनुसूया प्रसाद गौड़, जसवंत शाह, सरोज शाह, दिनेश गौड़, मनीष मठपाल सहित सेकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

श्रीनगर राम लीला मे भगवान राम के अयोध्या पहुचने पर शहर मे निकली भब्य शोभायात्रा- फोटो : SHRINAGAR