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डोमिसाइल कानून का विरोध, नेकां, कांग्रेस बोली-युवाओं के लिए नौकरी के अवसर घटेंगे

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जम्मू। केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में नए डोमिसाइल नियमों का विरोध शुरू हो गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसके निरस्तीकरण की मांग की है। इसे प्रदेश के युवाओं के साथ विश्वासघात करार दिया है। इधर कुछ संगठन डोमिसाइल कानून के समर्थन में भी हैं। इसे पाकिस्तानी रिफ्यूजियों और कश्मीरी पंडितों के लिए सही फैसला बता रहे हैं।
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नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) ने एक बयान जारी कर कहा कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट 2019 को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है और यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में संवैधानिक तौर पर ऐसे फैसले नहीं लिए जा सकते हैं। नेकां ने संसद और बाहर भी 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के फैसले के साथ प्रदेश के विशेष दर्जे को वापस लेने का विरोध किया था। इससे जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक गारंटी को छीन लिया गया। राज्य का विभाजन और इसका विस्तार करना असंवैधानिक और एकतरफा है। यह संविधान की मूल संरचना के खिलाफ भी है। डोमिसाइल व्यवस्था जनसांख्यिकीय परिवर्तन को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई है। जम्मू-कश्मीर कोरोना से लड़ रहा है और केंद्र सरकार ऐसे फैसले थोप रही है। पार्टी ने केंद्र सरकार से डोमिसाइल आदेश और प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की मांग की है।
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डोमिसाइल कानून प्रदेश के युवाओं के साथ विश्वासघात : कांग्रेस
जम्मू। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीए मीर ने कहा कि नए डोमिसाइल नियम लागू होने से बाहरी राज्यों के लोगों को वह सभी अधिकार मिल जाएंगे जो जम्मू-कश्मीर के मूल निवासियों को मिल रहे हैं। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन पर भरोसा दिलाया था कि जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के अधिकारों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं किया गया है।
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मीर ने डोमिसाइल को विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर के युवाओं के साथ विश्वासघात करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नौकरियों और भूमि के अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा का वादा किया था, लेकिन लोगों को गुमराह करती रही। सरकार ने इस कानून से बाहरी लोगों को सभी सीमित सरकारी नौकरियों और भूमि के साथ-साथ अन्य सभी संसाधनों के लिए पात्र होने की अनुमति दी है। भाजपा ने प्रदेश के नागरिकों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के खोखले दावे किए हैं।
डोमिसाइल कानून लोगों पर थोपा गया : सीपीआईएम
जम्मू। सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता मोहम्मद यूसुफ तारीगमी ने कहा कि भाजपा सरकार केंद्र शासित प्रदेश को नया स्वरूप देने में व्यस्त है। मौजूदा समय में प्रदेश कोरोना संक्रमण से ग्रस्त होता जा रहा है। कोरोना की रोकथाम के लिए प्रशासन गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि डोमीसाइल नियमों को नए सिरे से निर्धारित करने की जरूरत है। मौजूदा समय में डोमिसाइल को लोगों पर थोपा गया है। कोरोना से बचाव को प्रदेश में पुख्ता प्रबंध होने चाहिएं।
73 साल बाद पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को मिला हक
जम्मू। वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी एक्शन कमेटी (डब्ल्यूपीआरएसी) के चेयरमैन लाभा राम गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा डोमेसाइल एक्ट लागू करने के कदमों की सराहना की है। बैठक में उन्होंने कहा कि इस फैसले से 73 साल बाद पाकिस्तान के रिफ्यूजियों को उनका हक मिलेगा। गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों की जायज मांग को पूरा किया है। गांधी ने इस मौके पर भाजपा के मंत्रियों अविनाश राय खन्ना, डॉ. जितेंद्र सिंह, जुगल किशोर शर्मा का भी आभार व्यक्त किया। गांधी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की पूर्व सरकारों द्वारा संविधान में बदलाव कर दो बार चीनी नागरिकों को नागरिकता दी गई थी लेकिन जो लोग 1947 से यहां रह रहे हैं उनके बारे में कभी नहीं सोचा गया। इस बैठक में जगदीश सिंह मन्हास, सुखदेव सिंह, शक्ति शर्मा और बलवीर राज मौजूद रहे।
नए डोमिसाइल नियमों से शरणार्थियों और कश्मीरी
पंडितों को मिलेगा लंबित अधिकार : जेपी नड्डा
नई दिल्ली। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जम्मू-कश्मीर के नए डोमिसाइल नियमों की तारीफ करते हुए कहा है कि इससे सभी शरणार्थियों और केंद्र शासित प्रदेश से बाहर रह रहे कश्मीरी पंडितों को उनका लंबित अधिकार मिलेगा।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से सोमवार को जारी नए डोमिसाइल नियमों से वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी, वाल्मीकि समाज के लोगों, समुदाय से बाहर शादी करने वाली महिलाओं और गैर पंजीकृत प्रवासी कश्मीरियों और विस्थापित लोगों को जल्द ही निवास प्रमाण पत्र मिल जाएगा।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ट्विटर पर लिखा, ‘जम्मू-कश्मीर गैजेट में शामिल किए गए नए डोमिसाइल नियम स्वागत योग्य हैं। यह सभी शरणार्थियों को उनका लंबे समय से लंबित अधिकार देगा। वेस्ट पाक रिफ्यूजी, जम्मू-कश्मीर से बाहर रह रहे कश्मीरी पंडितों के बच्चे डोमिसाइल के लिए दावा कर सकते हैं।
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