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Pauri News: पारंपरिक मोटे अनाज से तैयार उत्पाद स्वरोजगार का बेहतर साधन
Sat, 16 May 2026 06:06 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sat, 16 May 2026 06:06 PM IST
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श्रीनगर के नैथाणा में अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं व अन्य----
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम-- -- -- -- -- --
श्रीनगर। पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाला मोटा अनाज आजीविका और स्वरोजगार के लिए बेहतर विकल्प है। उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाज जैसे मंडुवा, झंगोरा और जौ आज स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों के रूप में देशभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। यदि महिलाएं इन उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग और गुणवत्ता के साथ बाजार में उतारें तो इससे अच्छा स्वरोजगार स्थापित किया जा सकता है।
यह बात अमर उजाला की ओर से महिला उद्यमी व स्वरोजगार विषय पर नौथाणा में आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद के परियोजना अधिकारी दिलीप सिंह कुशवाह ने कही। उन्होंने उद्यमिता प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से कहा कि महिलाएं स्थानीय उत्पादों को रोजगार का माध्यम बना सकती हैं। कहा कि मोटा अनाज पोषण से भरपूर होता है इसके उत्पाद कम लागत में तैयार किए जा सकते हैं जिससे यह रोजगार का बेहतर विकल्प बन सकता है। उन्होंने महिलाओं को समूह बनाकर स्वरोजगार शुरू करने, ऑनलाइन और स्थानीय बाजारों से जुड़ने व सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया।
प्रोफेशनल ट्रेनर सुदेश धीमान ने महिलाओं को उद्यमिता, विपणन, उत्पाद गुणवत्ता और स्वरोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। बताया कि मंडुवे, झंगोरे, आटे और जौ के बिस्किट, , नमकीन, केक, लड्डू, चकली जैसे उत्पादों को तैयार कर इसे आजीविका का साधन बनाया जा सकता है। सुदेश धीमान ने अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम जागरूकता फैलाने में अहम साबित होते हैं। मौके पर मौजूद महिलाओं शकुंतला देवी, भारती देवी, कुसुम चौहान, बीना देवी आदि ने मोटे अनाज से उत्पादों को तैयार करने, पैकेजिंग व उत्पादों के विपणन के बारे में भी जानकारी ली।
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श्रीनगर। पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाला मोटा अनाज आजीविका और स्वरोजगार के लिए बेहतर विकल्प है। उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाज जैसे मंडुवा, झंगोरा और जौ आज स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों के रूप में देशभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। यदि महिलाएं इन उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग और गुणवत्ता के साथ बाजार में उतारें तो इससे अच्छा स्वरोजगार स्थापित किया जा सकता है।
यह बात अमर उजाला की ओर से महिला उद्यमी व स्वरोजगार विषय पर नौथाणा में आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद के परियोजना अधिकारी दिलीप सिंह कुशवाह ने कही। उन्होंने उद्यमिता प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से कहा कि महिलाएं स्थानीय उत्पादों को रोजगार का माध्यम बना सकती हैं। कहा कि मोटा अनाज पोषण से भरपूर होता है इसके उत्पाद कम लागत में तैयार किए जा सकते हैं जिससे यह रोजगार का बेहतर विकल्प बन सकता है। उन्होंने महिलाओं को समूह बनाकर स्वरोजगार शुरू करने, ऑनलाइन और स्थानीय बाजारों से जुड़ने व सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया।
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प्रोफेशनल ट्रेनर सुदेश धीमान ने महिलाओं को उद्यमिता, विपणन, उत्पाद गुणवत्ता और स्वरोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। बताया कि मंडुवे, झंगोरे, आटे और जौ के बिस्किट, , नमकीन, केक, लड्डू, चकली जैसे उत्पादों को तैयार कर इसे आजीविका का साधन बनाया जा सकता है। सुदेश धीमान ने अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम जागरूकता फैलाने में अहम साबित होते हैं। मौके पर मौजूद महिलाओं शकुंतला देवी, भारती देवी, कुसुम चौहान, बीना देवी आदि ने मोटे अनाज से उत्पादों को तैयार करने, पैकेजिंग व उत्पादों के विपणन के बारे में भी जानकारी ली।
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