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पंथ्या दादा स्मृति महोत्सव: ढोल सागर की गूंज और नृत्य नाटिका ने मन मोहा
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चमराड़ा मे पंथ्या दादा स्मृति महोत्सव के समापन अवसर पर साहित्यकार नन्द किशोर हटवाल को सम्मानित ?
- फोटो : SHRINAGAR
विकासखंड खिर्सू के न्यायपंचायत मुख्यालय चमराड़ा में आयोजित तीन दिवसीय पंथ्या दादा स्मृति महोत्सव के अंतिम दिन ढोल सागर की गूंज और पंथ्या दादा नृत्य नाटिका का मंचन मुख्य आकर्षण बने रहे। इस मौके पर साहित्यकार डा. नंदकिशोर हटवाल को वर्ष 2020 के पंथ्या दादा सामाजिक, साहित्यिक व सांस्कृतिक स्मृति सम्मान से भी नवाजा किया।
रविवार को मेले के अंतिम दिन समाजसेवी मोहन काला, देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी महंत नितिन पुरी, विमल बहुगुणा व पूर्व पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। इसके बाद भगवान गणेश की वंदना से कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। मौके पर रंगकर्मी विमल बहुगुणा की पांडव वाणी और पंथ्या दादा नृत्य नाटिका दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण रहे। जबकि ढोल सागर व लोक गायिका पम्मी नवल एवं साथी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। इस मौके पर महोत्सव के संयोजक डा. सुभाष पांडे, ज्येष्ठ प्रमुरव भगवान सिंह, सुरजीत बिष्ट, मुकेश काला, जतेन्द्र सिंह, मनोज बिष्ट, भोपाल सिंह, प्रभाकर बाबुलकर व मुकेश भंडारी आदि मौजूद थे।
महोत्सव में काष्ठकला का प्रदर्शन
श्रीनगर। पंथ्या दादा स्मृति महोत्सव में अध्यापक अरविंद नेगी द्वारा तैयार की गई बेजान लकड़ी की विभिन्न कलाकृतियां भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहे। उन्होंने लकड़ियों में जान फूंक कर आकृतियों को लोगों के लिए प्रेरणादायी बनाया।
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पंथ्या दादा के गांव सुमाड़ी में भी रही डौंर थाली की गूंज
श्रीनगर। पंथ्या दादा के गांव सुमाड़ी में भी डौंर थाली की गूंज रही। यहां पितृ पूजा के बाद सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया। इस मौके पर समाज सेवी मोहन काला, नेत्र मणि मलासी, इंद्रमोहन काला, सत्यदेव बहुगुणा, विमलचंद्र काला, रतीश काला व मोहन प्रकाश गायत्री आदि मौजूद थे।
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रविवार को मेले के अंतिम दिन समाजसेवी मोहन काला, देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी महंत नितिन पुरी, विमल बहुगुणा व पूर्व पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। इसके बाद भगवान गणेश की वंदना से कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। मौके पर रंगकर्मी विमल बहुगुणा की पांडव वाणी और पंथ्या दादा नृत्य नाटिका दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण रहे। जबकि ढोल सागर व लोक गायिका पम्मी नवल एवं साथी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। इस मौके पर महोत्सव के संयोजक डा. सुभाष पांडे, ज्येष्ठ प्रमुरव भगवान सिंह, सुरजीत बिष्ट, मुकेश काला, जतेन्द्र सिंह, मनोज बिष्ट, भोपाल सिंह, प्रभाकर बाबुलकर व मुकेश भंडारी आदि मौजूद थे।
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महोत्सव में काष्ठकला का प्रदर्शन
श्रीनगर। पंथ्या दादा स्मृति महोत्सव में अध्यापक अरविंद नेगी द्वारा तैयार की गई बेजान लकड़ी की विभिन्न कलाकृतियां भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहे। उन्होंने लकड़ियों में जान फूंक कर आकृतियों को लोगों के लिए प्रेरणादायी बनाया।
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पंथ्या दादा के गांव सुमाड़ी में भी रही डौंर थाली की गूंज
श्रीनगर। पंथ्या दादा के गांव सुमाड़ी में भी डौंर थाली की गूंज रही। यहां पितृ पूजा के बाद सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया। इस मौके पर समाज सेवी मोहन काला, नेत्र मणि मलासी, इंद्रमोहन काला, सत्यदेव बहुगुणा, विमलचंद्र काला, रतीश काला व मोहन प्रकाश गायत्री आदि मौजूद थे।