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वनाग्नि की सूचना समय से न देने पर अफसर की जवाबदेही होगी : जिलाधिकारी
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पौड़ी। वनाग्नि रोकथाम तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिला कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में बैठक ली। इस दौरान अधिकारियों को वनाग्नि के प्रति जागरूकता को लेकर जनपद भर में अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि वनाग्नि की सूचना समय पर कंट्रोल रूम तक नहीं पहुंचाने पर संबंधित बीट अधिकारी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
बृहस्पतिवार को आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों व संबंधित विभागाध्यक्षों को वनाग्नि के प्रति व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाकर इसकी दैनिक रूप से सूचना जिला मुख्यालय पर स्थापित कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
कहा कि काश्तकार अपने खेतों व उसके आसपास की झाड़ियां (आड़ा) न जलाएं। इसके लिए उन्होंने कृषि, वन, पशुपालन व उद्यान विभाग के अधिकारियों को काश्तकारों के बीच वनाग्नि को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग को सात दिन में वनाग्नि की दृष्टि से चिह्नित 47 संवेदनशील स्थलों की माइक्रो लेवल प्लान प्रस्तुत करने को कहा। कहा कि वन विभाग के संबंधित फॉरेस्ट गार्ड द्वारा यदि सेटेलाइट इमेज प्राप्त होने से पहले वनाग्नि की सूचना नहीं दी जाती है तो ऐसी स्थिति में संबंधित क्षेत्र के फॉरेस्ट गार्ड/बीट अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। वनाग्नि के दौरान ड्रोन के सदुपयोग को लेकर आपदा व वन विभाग के ड्रोन ऑपरेटरों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए हैं।
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जिलाधिकारी ने शिक्षा व वन विभाग के अधिकारियों को वनाग्नि के दृष्टिगत संवेदनशील ऐसे स्कूलों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं जो जंगल से सटे होने के कारण वनाग्नि की चपेट में आ सकते हैं। उन्होंने एक टास्क फोर्स के गठन के निर्देश भी दिए हैं, जो कि प्रत्येक 15 दिन में स्थिति की समीक्षा करते हुए रिपोर्ट आपदा प्रबंधन को कराएंगे। उन्होंने वनाग्नि की रोकथाम के लिए शीतलाखेत मॉडल नासा के रिसर्च डेटा पर वन विभाग द्वारा अब तक के कार्यों की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। अनियंत्रित वनाग्नि पर काबू पाने के लिए भारतीय वायु सेना से मदद लेने की संभावना की दृष्टिगत जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को आवश्यक समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में डीएफओ सीविल एवं सोयम पवन सिंह, एसडीओ वन विभाग आईशा बिष्ट, उपजिलाधिकारी धुमाकोट रेखा आर्य, प्रशिक्षु पीसीएस कृष्णा त्रिपाठी, सीओ पुलिस तूषार बोरा आदि मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों व संबंधित विभागाध्यक्षों को वनाग्नि के प्रति व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाकर इसकी दैनिक रूप से सूचना जिला मुख्यालय पर स्थापित कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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कहा कि काश्तकार अपने खेतों व उसके आसपास की झाड़ियां (आड़ा) न जलाएं। इसके लिए उन्होंने कृषि, वन, पशुपालन व उद्यान विभाग के अधिकारियों को काश्तकारों के बीच वनाग्नि को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग को सात दिन में वनाग्नि की दृष्टि से चिह्नित 47 संवेदनशील स्थलों की माइक्रो लेवल प्लान प्रस्तुत करने को कहा। कहा कि वन विभाग के संबंधित फॉरेस्ट गार्ड द्वारा यदि सेटेलाइट इमेज प्राप्त होने से पहले वनाग्नि की सूचना नहीं दी जाती है तो ऐसी स्थिति में संबंधित क्षेत्र के फॉरेस्ट गार्ड/बीट अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। वनाग्नि के दौरान ड्रोन के सदुपयोग को लेकर आपदा व वन विभाग के ड्रोन ऑपरेटरों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए हैं।
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जिलाधिकारी ने शिक्षा व वन विभाग के अधिकारियों को वनाग्नि के दृष्टिगत संवेदनशील ऐसे स्कूलों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं जो जंगल से सटे होने के कारण वनाग्नि की चपेट में आ सकते हैं। उन्होंने एक टास्क फोर्स के गठन के निर्देश भी दिए हैं, जो कि प्रत्येक 15 दिन में स्थिति की समीक्षा करते हुए रिपोर्ट आपदा प्रबंधन को कराएंगे। उन्होंने वनाग्नि की रोकथाम के लिए शीतलाखेत मॉडल नासा के रिसर्च डेटा पर वन विभाग द्वारा अब तक के कार्यों की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। अनियंत्रित वनाग्नि पर काबू पाने के लिए भारतीय वायु सेना से मदद लेने की संभावना की दृष्टिगत जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को आवश्यक समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में डीएफओ सीविल एवं सोयम पवन सिंह, एसडीओ वन विभाग आईशा बिष्ट, उपजिलाधिकारी धुमाकोट रेखा आर्य, प्रशिक्षु पीसीएस कृष्णा त्रिपाठी, सीओ पुलिस तूषार बोरा आदि मौजूद रहे।