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बारिश में कीचड़, गर्मियों में धूल से जीना हुआ मुश्किल
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जल विद्युत परियोजना प्रभावित क्षेत्र चौरास के लोग आज भी समस्याओं से जूझ रहे हैं। बारिश होने पर सड़कों पर पानी के तालाब बनने से लोगों का आनाजाना मुश्किल हो जाता है, जबकि गर्मियों में कच्ची सड़कों से उड़ने वाली धूल लोगों को घरों में कैद कर देती है।
विकास खंड कीर्तिनगर के चौरास में सुपाणा से नौर नेग्याणा तक आबादी क्षेत्र के मध्य श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की शक्ति नहर का निर्माण करवाया गया है। साथ ही नहर के दोनों ओर चौड़ी सड़कें भी बनाई गई है। इस निर्माण से चौरास क्षेत्र के लोगों के आम रास्ते बंद होने से स्थानीय लोग शक्ति नहर के दोनों ओर निर्मित मार्गों से आवाजाही करते हैं, लेकिन आज तक परियोजना संचालन कंपनी की ओर से इन मार्गों का डामरीकरण नहीं किया गया है। जिससे बारिश में मार्ग के कई स्थानों पर पानी के तालाब और दलदल होने से लोगों का आनाजाना मुश्किल हो जाता है, जबकि गर्मियों में धूलभरी आंधी चौरास क्षेत्र सहित श्रीनगर, श्रीकोट और आसपास के गांवों के लोगों का जीना मुश्किल कर देती है।
स्थानीय निवासी देवेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, पशुपति उनियाल, विक्रम सिंह ने बताया कि वर्ष 2007-08 में श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। तब से क्षेत्र के लोग धूल और मिट्टी से खासे परेशान हैं। हर तीसरे या चौथे वर्ष भवनों की पुताई करनी पड़ रही है। घरों में रखा हजारों का समान भी बरबाद हो रहा है। गर्मियों में धूलभरी आंधी चलने से घरों की खिड़की और दरवाजे खोलना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि अब सात वर्ष से परियोजना से बिजली का उत्पादन हो रहा है, लेकिन परियोजना संचालन कंपनी ने आज तक समस्या का समाधान नहीं किया। जबकि परियोजना संचालन कंपनी ने कहा था कि शक्तिनहर के दोनों ओर की सड़कों का डामरीकरण किया जाएगा। साथ ही पौधरोपण कर हरित पट्टी बनाई जाएगी, लेकिन आज तक यह कार्य पूरा न होने पर क्षेत्र के लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
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स्थानीय लोगों की समस्या के समाधान पर परियोजना संचालक कंपनी के अधिकारियों के साथ वार्ता हुई है। कुछ समस्याओं का समाधान किया गया है। अब धूल मिट्टी व सड़कों की दशा सुधारने के लिए शीघ्र बैठक कर उन्हें निर्देशित किया जाएगा। -सोनिया पंत, उप जिलाधिकारी कीर्तिनगर।
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विकास खंड कीर्तिनगर के चौरास में सुपाणा से नौर नेग्याणा तक आबादी क्षेत्र के मध्य श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की शक्ति नहर का निर्माण करवाया गया है। साथ ही नहर के दोनों ओर चौड़ी सड़कें भी बनाई गई है। इस निर्माण से चौरास क्षेत्र के लोगों के आम रास्ते बंद होने से स्थानीय लोग शक्ति नहर के दोनों ओर निर्मित मार्गों से आवाजाही करते हैं, लेकिन आज तक परियोजना संचालन कंपनी की ओर से इन मार्गों का डामरीकरण नहीं किया गया है। जिससे बारिश में मार्ग के कई स्थानों पर पानी के तालाब और दलदल होने से लोगों का आनाजाना मुश्किल हो जाता है, जबकि गर्मियों में धूलभरी आंधी चौरास क्षेत्र सहित श्रीनगर, श्रीकोट और आसपास के गांवों के लोगों का जीना मुश्किल कर देती है।
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स्थानीय निवासी देवेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, पशुपति उनियाल, विक्रम सिंह ने बताया कि वर्ष 2007-08 में श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। तब से क्षेत्र के लोग धूल और मिट्टी से खासे परेशान हैं। हर तीसरे या चौथे वर्ष भवनों की पुताई करनी पड़ रही है। घरों में रखा हजारों का समान भी बरबाद हो रहा है। गर्मियों में धूलभरी आंधी चलने से घरों की खिड़की और दरवाजे खोलना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि अब सात वर्ष से परियोजना से बिजली का उत्पादन हो रहा है, लेकिन परियोजना संचालन कंपनी ने आज तक समस्या का समाधान नहीं किया। जबकि परियोजना संचालन कंपनी ने कहा था कि शक्तिनहर के दोनों ओर की सड़कों का डामरीकरण किया जाएगा। साथ ही पौधरोपण कर हरित पट्टी बनाई जाएगी, लेकिन आज तक यह कार्य पूरा न होने पर क्षेत्र के लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
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स्थानीय लोगों की समस्या के समाधान पर परियोजना संचालक कंपनी के अधिकारियों के साथ वार्ता हुई है। कुछ समस्याओं का समाधान किया गया है। अब धूल मिट्टी व सड़कों की दशा सुधारने के लिए शीघ्र बैठक कर उन्हें निर्देशित किया जाएगा। -सोनिया पंत, उप जिलाधिकारी कीर्तिनगर।