{"_id":"3e4abd950f6cf56ff3f5f5980795ac33","slug":"medical-college-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कालेज की राह में जमीन का रोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल कालेज की राह में जमीन का रोड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटद्वार
Updated Tue, 12 May 2015 11:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेडिकल कालेज की राह में जमीन का रोड़ा फंसता नजर आ रहा है। प्रशासन को मेडिकल कालेज के लिए निर्माणाधीन बेस अस्पताल के दस किमी की परिधि में एकसाथ करीब पंद्रह एकड़ जमीन मिलना मुश्किल हो गया है।
ऐसे में कलालघाटी के पास नदी श्रेणी में दर्ज करीब दो सौ बीघा जमीन के अलावा कोई और विकल्प नजर नहीं आ रहा है।
कोटद्वार में प्रस्तावित मेडिकल कालेज के लिए जमीन तलाशने का काम जोर-शोर से चल रहा है। एक ओर जहां बेस अस्पताल के लिए एक साथ पांच एकड़ जमीन पूरी की जा रही है, वहीं प्रशासन बेस अस्पताल के आसपास दस किमी की परिधि में करीब 15 एकड़ भूमि तलाशने में जुटा है।
पूरे भाबर में इतनी उपयुक्त सरकारी जमीन मिलना टेढ़ी खीर बना हुआ है। यूपी राजकीय निर्माण निगम और स्थानीय प्रशासन बेस अस्पताल के लिए कौड़िया से लेकर कलालघाटी और सिगड्डी जयदेवपुर तक की जमीन देख चुके हैं। सभी जमीनों की अपनी अलग तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं।
विज्ञापन
जयदेवपुर की करीब पच्चीस एकड़ जमीन जहां अस्पताल से दस किमी के दायरे से बाहर हो रही है। वहीं कलालघाटी की जमीन मालन नदी से सटी और नदी श्रेणी में दर्ज है। इस जमीन का तल भी नदी से थोड़ा ही ऊंचा है, जहां भविष्य में बाढ़ की आशंका बनी रहेगी।
ऐसे में शासन-प्रशासन की नजर कौड़िया में पर्यटन विभाग की उस जमीन पर भी लगी है, जहां पर्यटन प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इस बात के लिए दबाव डाल रहे हैं कि जनहित में उक्त भूमि को मेडिकल कालेज के लिए दे दिया जाए और पर्यटन प्रोजेक्ट को कलालघाटी में कण्वाश्रम के नजदीक वाली जमीन दे दी जाए।
मौजूदा सरकारी अस्पताल को बेस चिकित्सालय का दर्जा देने के लिए भी कम से कम पांच एकड़ जमीन की जरूरत है, जो कम पड़ रही है। जिसके लिए अस्पताल के आसपास की भूमि को लेने के प्रयास तेज हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार मेडिकल कालेज के लिए कम से कम पंद्रह एकड़ जमीन की जरूरत है।
विज्ञापन
ऐसे में कलालघाटी के पास नदी श्रेणी में दर्ज करीब दो सौ बीघा जमीन के अलावा कोई और विकल्प नजर नहीं आ रहा है।
कोटद्वार में प्रस्तावित मेडिकल कालेज के लिए जमीन तलाशने का काम जोर-शोर से चल रहा है। एक ओर जहां बेस अस्पताल के लिए एक साथ पांच एकड़ जमीन पूरी की जा रही है, वहीं प्रशासन बेस अस्पताल के आसपास दस किमी की परिधि में करीब 15 एकड़ भूमि तलाशने में जुटा है।
विज्ञापन
पूरे भाबर में इतनी उपयुक्त सरकारी जमीन मिलना टेढ़ी खीर बना हुआ है। यूपी राजकीय निर्माण निगम और स्थानीय प्रशासन बेस अस्पताल के लिए कौड़िया से लेकर कलालघाटी और सिगड्डी जयदेवपुर तक की जमीन देख चुके हैं। सभी जमीनों की अपनी अलग तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं।
विज्ञापन
जयदेवपुर की करीब पच्चीस एकड़ जमीन जहां अस्पताल से दस किमी के दायरे से बाहर हो रही है। वहीं कलालघाटी की जमीन मालन नदी से सटी और नदी श्रेणी में दर्ज है। इस जमीन का तल भी नदी से थोड़ा ही ऊंचा है, जहां भविष्य में बाढ़ की आशंका बनी रहेगी।
ऐसे में शासन-प्रशासन की नजर कौड़िया में पर्यटन विभाग की उस जमीन पर भी लगी है, जहां पर्यटन प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इस बात के लिए दबाव डाल रहे हैं कि जनहित में उक्त भूमि को मेडिकल कालेज के लिए दे दिया जाए और पर्यटन प्रोजेक्ट को कलालघाटी में कण्वाश्रम के नजदीक वाली जमीन दे दी जाए।
मौजूदा सरकारी अस्पताल को बेस चिकित्सालय का दर्जा देने के लिए भी कम से कम पांच एकड़ जमीन की जरूरत है, जो कम पड़ रही है। जिसके लिए अस्पताल के आसपास की भूमि को लेने के प्रयास तेज हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार मेडिकल कालेज के लिए कम से कम पंद्रह एकड़ जमीन की जरूरत है।