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पुस्तक प्रेम ही सफलता का पहला सूत्र : कुलपति
Sat, 15 Nov 2025 06:50 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sat, 15 Nov 2025 06:50 PM IST
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देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में पुस्तकालय सप्ताह का शुभारंभ हो गया है। कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि प्रतिभा निखारने और रचनात्मकता उत्पन्न करने में पुस्तकें सबसे अधिक सहायक होती हैं।
पुस्तक प्रेम ही सफलता का पहला सूत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुस्तक पढ़ने की आदत से न केवल समय का सदुपयोग होता है, बल्कि मन में अनावश्यक विचारों का प्रवेश भी नहीं होता। उन्होंने पुस्तकों को हमारी सच्ची मित्र, मार्गदर्शक और संकटमोचक बताया।
परिसर के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. पीएम गुप्ता ने विवि की इस पहल को किताबों की संस्कृति को हरा-भरा करने का प्रयास बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने की। उन्होंने प्राचीन परंपरा के अनुरूप वर्तमान में पुस्तकों के कम पढ़े जाने पर खेद व्यक्त किया। संयोजक नवीन डोबरियाल ने बताया कि पुस्तकालय सप्ताह के अंतर्गत बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार की स्पर्धाएं और कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सोमेश बहुगुणा ने किया और स्वागत भाषण डॉ. ब्रह्मानंद मिश्रा ने दिया। इस अवसर पर प्रो. सह निदेशिका प्रो. चंद्रकला आर. कोंडी सहित अध्यापक मौजूद रहे।
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पुस्तक प्रेम ही सफलता का पहला सूत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुस्तक पढ़ने की आदत से न केवल समय का सदुपयोग होता है, बल्कि मन में अनावश्यक विचारों का प्रवेश भी नहीं होता। उन्होंने पुस्तकों को हमारी सच्ची मित्र, मार्गदर्शक और संकटमोचक बताया।
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परिसर के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. पीएम गुप्ता ने विवि की इस पहल को किताबों की संस्कृति को हरा-भरा करने का प्रयास बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने की। उन्होंने प्राचीन परंपरा के अनुरूप वर्तमान में पुस्तकों के कम पढ़े जाने पर खेद व्यक्त किया। संयोजक नवीन डोबरियाल ने बताया कि पुस्तकालय सप्ताह के अंतर्गत बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार की स्पर्धाएं और कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सोमेश बहुगुणा ने किया और स्वागत भाषण डॉ. ब्रह्मानंद मिश्रा ने दिया। इस अवसर पर प्रो. सह निदेशिका प्रो. चंद्रकला आर. कोंडी सहित अध्यापक मौजूद रहे।
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