उपेक्षा से आहत है शहीद यशोधर बेंजवाल की पत्नी
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राज्य आंदोलन में शहीद आंदोलनकारियों के परिजन सरकारी रवैये से आहत हैं। शहीद यशोधर बेंजवाल की पत्नी उमा बेंजवाल डेढ़ दशक से पदोन्नति व आवास के लिए विभागीय अधिकारियों सहित राजनेताओं के चक्कर काट कर थक चुकी हैं।
उन्हें न तो पदोन्नति मिली और न ही आवास मिल पाया है। वह आज भी सास व अपने बहू- बेटों के साथ पाीडब्ल्यूडी के टीन शेड में रहने को मजबूर है।
उत्तराखंड आंदोलन के दौरान 10 नवंबर 1995 में श्रीयंत्र टापू कांड के दौरान शहीद हुए यशोधर बेंजवाल की उपेक्षा से परिजन दुखी हैं। उमा बेंजवाल का कहना है कि उनका चिह्नीकरण तक नहीं किया है। जीजीआईसी गोपेश्वर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप तैनात हुए उसे 15 वर्ष हो चुके हैं। वर्ष 2002 में इंटर करने के बावजूद उन्हें पदोन्नति नहीं मिल पा रही है।
उमा बेंजवाल ने कहा कि वह आज भी पीडब्ल्यूडी के एक टीनशेड में सास व अपने बहू बेटे के साथ रहने को मजबूर है। जबकि वह आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ ही डीएम व विभागीय अधिकारियों तक गुहार लगा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाते हुए राज्य आंदोलनकारियों के नाम पर कई सुविधाएं प्राप्त की हैं, लेकिन वास्तविक आंदोलनकारी आज भी संघर्ष कर रहे हैं। शहीदों के परिजनों को आज भी कुछ हासिल नहीं हुआ है।a