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पहाड़ में सीट बेल्ट की अनिवार्यता पर रोष

Sun, 19 Jan 2020 09:48 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jan 2020 09:48 PM IST
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Kaliasoud accident Fury over the inevitability of seat belts in the mountain
कलियासौड़ मे हुयी कार दुर्घटना के बाद घटना स्थल पर जमा भीड़ । - फोटो : SHRINAGAR
बदरीनाथ हाईवे पर कलियासौड़ के पास से अलकनंदा में समाई कार से दो मृतकों के शवों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ी। ड्राइविंग सीट पर बैठे कार स्वामी के शव को सीट बेल्ट काटकर बाहर निकलना पड़ा। इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद लोगों में पहाड़ में भी सीट बेल्ट की अनिवार्यता को लेकर खासा गुस्सा देखा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि यदि कार स्वामी ने सीट बेल्ट नहीं पहनी होती तो शायद बाहर छिटकने से उनकी भी जान बच सकती थी।
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युवा उक्रांद जिलाध्यक्ष गणेश भट्ट, नगर पालिका पार्षद अनूप बहुगुणा और कांग्रेस नेता जगदीश भट्ट का कहना है कि पहाड़ की भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए यहां सीट बेल्ट को अनिवार्य किया जाना किसी भी प्रकार से ठीक नहीं है। पर्वतीय रूटों पर या तो वाहनों में आमने-सामने टक्कर होती है या फिर अनियंत्रित वाहन के सीधे खाई में जाने से उसमें सवार लोगों को जान भी चली जाती है, लिहाजा पहाड़ के लिए सीट बेल्ट की अनिवार्यता को खत्म किया जाना चाहिए। रविवार को हुई दुर्घटना की खबर लगने के बाद सीट बेल्ट को लेकर सोशल मीडिया में भी काफी आक्रोश देखा जा रहा है। यूजर्स का कहना है कि यदि कार स्वामी ने सीट बेल्ट नहीं पहनी होती, तो शायद उनकी जान बच जाती। हादसे के दौरान कार में उनकी बेटी पीछे की सीट पर बैठी थी, कार के नदी में जाने से पहले बाहर छिटकने से ही उसकी जान बच गई। वह पहाड़ में सीट बेल्ट के प्रावधान को अतार्किक बता रहे हैं।
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दिव्यांशी के लिए देवदूत बना अज्ञात युवक
श्रीनगर। दिव्यांशी को बचाने एक अज्ञात युवक देवदूत की तरह आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार के गिरने के दौरान वहां से अन्य वाहन भी गुजर रहे थे। जैसे लोग अपने वाहनों से बाहर आए, तो उन्होंने दिव्यांशी को नदी किनारे गिरे देखा। इन्हीं वाहनों में शामिल एक कार में सवार युवक बिना किसी देरी के सीधी खाई में दौड़ पड़ा और दिव्यांशी को कंधे में अन्य लोगों की मदद से ऊपर ले आया।
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हाईवे की हालत भी है खराब
श्रीनगर। जिस स्थान पर वाहन गिरा है, वहां पर राजमार्ग की हालत बहुत खराब है। पहाड़ी की ओर पत्थर गिरने का खतरा भी बना रहता है।,ऐसे भी हो सकता है कि वाहन चालक पहाड़ी की ओर देखने के चक्कर में वाहन से नियंत्रण खो बैठा हो।
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