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Pauri News: मानवीय हस्तक्षेप के कारण बढ़ रहा मानव वन्यजीव संघर्ष
Sat, 22 Nov 2025 05:06 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sat, 22 Nov 2025 05:06 PM IST
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पौड़ी के बीआरएमएस स्कूल में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उपस्थित छात्र छात्राएं व शिक्षाविद- सं
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मानवीय हस्तक्षेप के कारण बढ़ रहा मानव वन्यजीव संघर्ष
- संवाद कार्यक्रम में छात्र छात्राओं ने भालू और गुलदार के हमलों के लिए वैज्ञानिक समाधान पर जोर दिया
- पकड़े जाने वाले जानवरों के लिए पहाड़ों में बनें रेस्क्यू सेंटर
पौड़ी। गढ़वाल क्षेत्र में भालू और गुलदार की बढ़ती घटनाओं पर स्कूली छात्रों ने चिंता जताते हुए कहा कि सुरंग निर्माण, ब्लास्टिंग और बढ़ती मानवीय गतिविधियां वन्यजीवों को भयभीत कर रही हैं, जिससे वे जंगलों से हटकर मानव बस्तियों की ओर आने लगे हैं। यह विचार अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए गए।
शनिवार को शहर के बीआर मॉर्डन स्कूल में जंगली जानवरों से कैसे मिले निजात—वैज्ञानिक तरीके से समाधान विषय पर संवाद आयोजित हुआ। कार्यक्रम में छात्रों ने हाल के हमलों को लेकर चिंता जाहिर की। शिवांगी ने कहा कि संघर्ष कम करने के लिए वैज्ञानिक समाधान अपनाए जाएं और पिंजरे में पकड़े जाने वाले भालू–गुलदारों के लिए पहाड़ों में ही रेस्क्यू सेंटर बनाए जाएं। कक्षा 12 के विज्ञान छात्र दिव्यांश कोहली ने जंगलों में वनीकरण बढ़ाने पर जोर दिया, जबकि वाणिज्य की छात्रा गुंजन ने मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में भोजन की कमी को गुलदारों के बस्तियों में आने का प्रमुख कारण बताया। वर्धामिनी ने कहा कि पलायन से खाली गांव वन्यजीवों का नया आवास बन गए हैं, इसलिए इन्हें फिर आबाद करने की आवश्यकता है। सृष्टि उनियाल और प्रगति ने सुरंगों की खुदाई व ब्लास्टिंग को संघर्ष बढ़ने का मूल कारण बताया। प्रधानाचार्य दामोदर प्रसाद ममगाईं ने कहा कि बढ़ती मानव आबादी और सीमित होते प्राकृतिक आवास से संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। कार्यक्रम में शिक्षाविद गोपाल ममगाईं और पूरण सिंह रावत भी उपस्थित रहे।
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- संवाद कार्यक्रम में छात्र छात्राओं ने भालू और गुलदार के हमलों के लिए वैज्ञानिक समाधान पर जोर दिया
- पकड़े जाने वाले जानवरों के लिए पहाड़ों में बनें रेस्क्यू सेंटर
पौड़ी। गढ़वाल क्षेत्र में भालू और गुलदार की बढ़ती घटनाओं पर स्कूली छात्रों ने चिंता जताते हुए कहा कि सुरंग निर्माण, ब्लास्टिंग और बढ़ती मानवीय गतिविधियां वन्यजीवों को भयभीत कर रही हैं, जिससे वे जंगलों से हटकर मानव बस्तियों की ओर आने लगे हैं। यह विचार अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए गए।
शनिवार को शहर के बीआर मॉर्डन स्कूल में जंगली जानवरों से कैसे मिले निजात—वैज्ञानिक तरीके से समाधान विषय पर संवाद आयोजित हुआ। कार्यक्रम में छात्रों ने हाल के हमलों को लेकर चिंता जाहिर की। शिवांगी ने कहा कि संघर्ष कम करने के लिए वैज्ञानिक समाधान अपनाए जाएं और पिंजरे में पकड़े जाने वाले भालू–गुलदारों के लिए पहाड़ों में ही रेस्क्यू सेंटर बनाए जाएं। कक्षा 12 के विज्ञान छात्र दिव्यांश कोहली ने जंगलों में वनीकरण बढ़ाने पर जोर दिया, जबकि वाणिज्य की छात्रा गुंजन ने मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में भोजन की कमी को गुलदारों के बस्तियों में आने का प्रमुख कारण बताया। वर्धामिनी ने कहा कि पलायन से खाली गांव वन्यजीवों का नया आवास बन गए हैं, इसलिए इन्हें फिर आबाद करने की आवश्यकता है। सृष्टि उनियाल और प्रगति ने सुरंगों की खुदाई व ब्लास्टिंग को संघर्ष बढ़ने का मूल कारण बताया। प्रधानाचार्य दामोदर प्रसाद ममगाईं ने कहा कि बढ़ती मानव आबादी और सीमित होते प्राकृतिक आवास से संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। कार्यक्रम में शिक्षाविद गोपाल ममगाईं और पूरण सिंह रावत भी उपस्थित रहे।
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