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स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों व कर्मचारियों को लगाई फटकार
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श्रीकोट बेस चिकित्सालय में मरीजों का हाल -चाल जानते मंत्री डॉ धन सिंह रावत
- फोटो : SHRINAGAR
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चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शुक्रवार रात बेस अस्पताल श्रीकोट को औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मरीजों और तीमारदारों की शिकायत व वार्डों में दिखी अव्यवस्थाओं पर उन्होंने डाक्टरों और कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए कार्यशैली में सुधार करने की चेतावनी दी।
अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने मंत्री को बताया कि डॉक्टर मरीजों को देखने समय से नहीं पहुंचते हैं। इस दौरान मंत्री को एक बेड पर चादर बिछी नहीं मिली तो उन्होंने वहां मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों को फटकार लगाई। इस मौके पर भाजपा अध्यक्ष गिरीश पैन्यूली, व्यापार सभा अध्यक्ष दिनेश असवाल, जिला मंत्री जितेंद्र रावत, जिला मीडिया प्रभारी गणेश भट्ट, देवेंद्र मणि मिश्रा, जितेंद्र धिरवान, जगमोहन नेगी व दिनेश रुडोला आदि मौजूद थे।
वहीं मंत्री के औचक निरीक्षण के दौरान मिली खामियों पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. सीएम रावत ने इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने बिना कारण मरीजों को रेफर करने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में यदि टीबी व चेस्ट का डॉक्टर न हो तो ऐसे मरीजों का आपसी समन्वय से मेडिसिन विभाग में उपचार किया जाए। अगर किसी विभाग में खामियां पाई गई तो इसके लिए संबंधित विभाग के एचओडी व सिस्टर इंचार्ज जिम्मेदार होंगे।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने मंत्री को बताया कि डॉक्टर मरीजों को देखने समय से नहीं पहुंचते हैं। इस दौरान मंत्री को एक बेड पर चादर बिछी नहीं मिली तो उन्होंने वहां मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों को फटकार लगाई। इस मौके पर भाजपा अध्यक्ष गिरीश पैन्यूली, व्यापार सभा अध्यक्ष दिनेश असवाल, जिला मंत्री जितेंद्र रावत, जिला मीडिया प्रभारी गणेश भट्ट, देवेंद्र मणि मिश्रा, जितेंद्र धिरवान, जगमोहन नेगी व दिनेश रुडोला आदि मौजूद थे।
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वहीं मंत्री के औचक निरीक्षण के दौरान मिली खामियों पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. सीएम रावत ने इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने बिना कारण मरीजों को रेफर करने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में यदि टीबी व चेस्ट का डॉक्टर न हो तो ऐसे मरीजों का आपसी समन्वय से मेडिसिन विभाग में उपचार किया जाए। अगर किसी विभाग में खामियां पाई गई तो इसके लिए संबंधित विभाग के एचओडी व सिस्टर इंचार्ज जिम्मेदार होंगे।
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