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गुलदार ने उखाड़ी गौशाला की छत
सतपुली/कोटद्वार
Updated Thu, 19 Nov 2015 06:25 PM IST
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तहसील क्षेत्रांतर्गत कौडिया पट्टी के ग्राम महरगांव (दैस्यूगांव) में बुधवार रात्रि गुलदार ने एक गौशाला की छत की पटालें उखाड़कर मवेशियों को अपना शिकार बनाने का प्रयास किया। वहीं मंगलवार को ही गुलदार ने बाघ ने ग्रामीण जगत सिंह की गौशाला की छत तोड़कर दुधारू गाय और बछड़े को निवाला बना लिया था। आये दिन गुलदार के हमलों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से पिजरा लगाने की मांग की है।
बुधवार देर रात्रि गुलदार ग्राम महरगांव निवासी जसवंत सिंह की गौशाला के छत की पाटलें उखाड़ रहा था। गौशाला कर तरफ से पत्थर गिरने की आवाज सुनकर पशुपालक की नींद खुल गई। गुलदार की भनक लगने पर उसने शोर मचाकर गुलदार को भगा दिया, जिससे गुलदार मवेशियों को अपना शिकार नहीं बना सका।
ग्राम प्रधान जितेंद्र रावत ने बताया कि मंगलवार को भी गुलदार ने महरगांव के पशुपालक जगत सिंह की गौशाला की छत तोड़कर एक दुधारू जर्सी गाय एवं उसके बछड़े को निवाला बना लिया था। जबकि एक गाय को बुरी तरह से घायल कर दिया। गांव के ठीक बीचों बीच स्थित इस गौशाला में बाघ ने तसल्ली बख्श दर्जनों फटालों को हटाया। उसके बाद मिट्टी एवं बल्लियों को खिसकाकर छत पर लगभग चार फुट चौड़ा छेद कर गौशाला में घुसकर घटना को अंजाम दिया। घटना की सूचना वन विभाग को दे दी गयी थी। दुधारू गाय की कीमत बीस हजार रूपए बतायी जा रही है।
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गुलदार द्वारा लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से गांव में पिंजरा लगाने की मांग की है।
-चरक के नाम से जाना जाता है यह गुलदार
सतपुली। पटालें निकालकर गौशाला में घुसने वाले गुलदार की इस प्रजाति को पहाड़ी क्षेत्रों में चरक नाम से जाना जाता है। महरगांव के 75 वर्षीय वयोवृद्व ग्रामीण आनंद सिंह रावत आदि ने इस संबंध में बताया कि कुछ वर्षों पूर्व तक जंगल में मवेशियों को चुगाने के लिए कई लोगों का समूह जाता था। इस कारण जंगल में जानवरों को मारने के मौके कम मिलने के कारण यह गुलदार (चरक) गौशालाओं को तोड़कर उसमें घुसते थे।
खच्चर को गुलदार ने निवाला बनाया
सतपुली। मल्ला बदलपुर पट्टी के ग्राम ग्वीलाणी में गत रात्रि गुलदार ने एक खच्चर को निवाला बना दिया। ग्रामीण दिलबर सिंह के अनुसार घर के निकट ही बाड़े में उसके तीन खच्चर बंधे थे। जिसमें से एक खच्चर को गुलदार ने गत रात्रि अपना निवाला बना लिया।
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बुधवार देर रात्रि गुलदार ग्राम महरगांव निवासी जसवंत सिंह की गौशाला के छत की पाटलें उखाड़ रहा था। गौशाला कर तरफ से पत्थर गिरने की आवाज सुनकर पशुपालक की नींद खुल गई। गुलदार की भनक लगने पर उसने शोर मचाकर गुलदार को भगा दिया, जिससे गुलदार मवेशियों को अपना शिकार नहीं बना सका।
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ग्राम प्रधान जितेंद्र रावत ने बताया कि मंगलवार को भी गुलदार ने महरगांव के पशुपालक जगत सिंह की गौशाला की छत तोड़कर एक दुधारू जर्सी गाय एवं उसके बछड़े को निवाला बना लिया था। जबकि एक गाय को बुरी तरह से घायल कर दिया। गांव के ठीक बीचों बीच स्थित इस गौशाला में बाघ ने तसल्ली बख्श दर्जनों फटालों को हटाया। उसके बाद मिट्टी एवं बल्लियों को खिसकाकर छत पर लगभग चार फुट चौड़ा छेद कर गौशाला में घुसकर घटना को अंजाम दिया। घटना की सूचना वन विभाग को दे दी गयी थी। दुधारू गाय की कीमत बीस हजार रूपए बतायी जा रही है।
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गुलदार द्वारा लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से गांव में पिंजरा लगाने की मांग की है।
-चरक के नाम से जाना जाता है यह गुलदार
सतपुली। पटालें निकालकर गौशाला में घुसने वाले गुलदार की इस प्रजाति को पहाड़ी क्षेत्रों में चरक नाम से जाना जाता है। महरगांव के 75 वर्षीय वयोवृद्व ग्रामीण आनंद सिंह रावत आदि ने इस संबंध में बताया कि कुछ वर्षों पूर्व तक जंगल में मवेशियों को चुगाने के लिए कई लोगों का समूह जाता था। इस कारण जंगल में जानवरों को मारने के मौके कम मिलने के कारण यह गुलदार (चरक) गौशालाओं को तोड़कर उसमें घुसते थे।
खच्चर को गुलदार ने निवाला बनाया
सतपुली। मल्ला बदलपुर पट्टी के ग्राम ग्वीलाणी में गत रात्रि गुलदार ने एक खच्चर को निवाला बना दिया। ग्रामीण दिलबर सिंह के अनुसार घर के निकट ही बाड़े में उसके तीन खच्चर बंधे थे। जिसमें से एक खच्चर को गुलदार ने गत रात्रि अपना निवाला बना लिया।