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अहंकार बढ़ने से नष्ट होता है मनुष्य का विवेक : ममगाईं
Fri, 23 Oct 2026 03:53 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Fri, 23 Oct 2026 03:53 PM IST
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श्रीनगर। श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांईं ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अहंकार और क्रोध बढ़ने से मनुष्य का विवेक नष्ट होने लगता है। कंस वध का प्रसंग अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कंसमर्दिनी मंदिर मार्ग स्थित मैदान में आयोजित कथा में आचार्य ममगांईं ने कहा कि कंस ने सत्ता के मद में निर्दोषों पर अत्याचार किए। भगवान श्रीकृष्ण ने उसका अंत कर धर्म की स्थापना की। रुक्मिणी हरण के प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मिणी की भक्ति भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। इस अवसर पर देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेश्वरी जोशी, प्रधान मनोज जोशी, व्यापार मंडल अध्यक्ष अनुज जोशी, कविता जोशी, सपना जोशी, सुबोध काला, उषा काला, उर्मिला काला आदि मौजूद रहे। संवाद
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कंसमर्दिनी मंदिर मार्ग स्थित मैदान में आयोजित कथा में आचार्य ममगांईं ने कहा कि कंस ने सत्ता के मद में निर्दोषों पर अत्याचार किए। भगवान श्रीकृष्ण ने उसका अंत कर धर्म की स्थापना की। रुक्मिणी हरण के प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मिणी की भक्ति भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। इस अवसर पर देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेश्वरी जोशी, प्रधान मनोज जोशी, व्यापार मंडल अध्यक्ष अनुज जोशी, कविता जोशी, सपना जोशी, सुबोध काला, उषा काला, उर्मिला काला आदि मौजूद रहे। संवाद
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