{"_id":"5de936428ebc3e547d5434de","slug":"gdp-system-does-not-show-the-contribution-of-farmers-shrinagar-news-drn328349194","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीडीपी व्यवस्था नहीं बताती किसानों का योगदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीडीपी व्यवस्था नहीं बताती किसानों का योगदान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पर्यावरणविद पद्मश्री डा. अनिल जोशी का कहना है कि वह जीडीपी प्रणाली को पसंद नहीं करते हैं। क्योंकि जीडीपी देश के चुनिंदा उद्योपतियों की प्रगति रिपोर्ट को प्रदर्शित करती है। यह व्यवस्था किसानों की बात नहीं करती है। यदि खेती नहीं रहेगी, तो रुपये-पैंसों का क्या करना है।
डा. जोशी पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन शिक्षक एवं शिक्षण योजना के तहत शिक्षा संकाय की ओर से शिक्षकों के लिए आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि गोष्ठियों के बजाय फील्ड में जाकर विकास की बात करनी चाहिए। हमारे देश में ऐसा होता है कि विदेश से फतवा जारी होता है और उस पर काम करने को कहा जाता है। यह परिपाटी रुकनी चाहिए। जोशी ने कहा कि पहाड़ में बहुत कुछ होता है, लेकिन पहाड़वासियों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। पानी हो या मिट्टी, सबका फायदा कोई और उठा रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि क्षेत्रीय विकास क्षेत्रीय लोगों से ही संभव है। पर्यावरण संसाधनों के अति दोहन से भविष्य में विश्व स्तर पर संकट पैदा होना तय है। शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रो. पीके जोशी ने कहा कि भारत ऐसा देश है, जहां पृथ्वी को पूजा जाता है। संयोजक प्रो. रमा मैखुरी ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। संचालन डा. आशु रौलेट ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
डा. जोशी पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन शिक्षक एवं शिक्षण योजना के तहत शिक्षा संकाय की ओर से शिक्षकों के लिए आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि गोष्ठियों के बजाय फील्ड में जाकर विकास की बात करनी चाहिए। हमारे देश में ऐसा होता है कि विदेश से फतवा जारी होता है और उस पर काम करने को कहा जाता है। यह परिपाटी रुकनी चाहिए। जोशी ने कहा कि पहाड़ में बहुत कुछ होता है, लेकिन पहाड़वासियों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। पानी हो या मिट्टी, सबका फायदा कोई और उठा रहा है।
विज्ञापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि क्षेत्रीय विकास क्षेत्रीय लोगों से ही संभव है। पर्यावरण संसाधनों के अति दोहन से भविष्य में विश्व स्तर पर संकट पैदा होना तय है। शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रो. पीके जोशी ने कहा कि भारत ऐसा देश है, जहां पृथ्वी को पूजा जाता है। संयोजक प्रो. रमा मैखुरी ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। संचालन डा. आशु रौलेट ने किया।
विज्ञापन