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सतत कृषि विकास पर हो फोकस

Sat, 12 Oct 2019 10:27 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 12 Oct 2019 10:27 PM IST
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Discussion on the challenges of agriculture
श्रीनगर। भारतीय अर्थशास्त्र परिषद और गढ़वाल (केंद्रीय) विवि के अर्थशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित भारत में कृषिकरण बदलाव एवं ग्रामीण विकास पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हो गया है। संगोष्ठी के पहले दिन कृषि की चुनौतियों पर चर्चा की गई।
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गढ़वाल विवि के प्रेक्षागृह में हुई संगोष्ठी में मुख्य अतिथि जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि पंतनगर के कुलपति प्रो. तेजप्रताप ने पर्वतीय क्षेत्रों में सतत कृषि विकास पर व्याख्यान देते हुए कहा कि यदि पलायन रोकना है, तो कृषि विकास पर ध्यान देना होगा। उन्होंने सतत कृषि विकास का रोड मैप भी प्रस्तुत किया। साथ ही विदेशों में पलायन को रोकने के लिए किए उपायों के उदाहरण भी दिए। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट साउथ एशिया के दिल्ली केंद्र के निदेशक प्रो. पीके जोशी भारत में कृषिकरण में आए बदलाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृषिकरण को प्रभावित करने वाले कारकों की भी जानकारी दी। उन्होने कहा कि सरकार और नीति नियंताओं को किसानों तक पहुंच बनाने के लिए पूर्ण भागीदारी निभानी होगी। गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि विकास की दौड़ में कृषि को पीछे छोड़ दिया गया है। पहले देहरादून में बासमती होती थी, लेकिन वहां इतना निर्माण हो गया कि बासमती लगभग गायब हो गई। कहा कि एक दिन ऐसा आएगा कि लोगों को वापस कृषि की तरफ मुड़ना पड़ेगा। इस अवसर पर भारतीय अर्थशास्त्र परिषद के सचिव डीके मदान, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. पीएस राणा, मुख्य नियंता प्रो. अरुण बहुगुुणा व डा. प्रशांत कंडारी आदि उपस्थित थे।
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